रिपोर्ट/सन्दीप शुक्ला
रामनगर, बाराबंकी।फाल्गुन माह के आगमन के साथ ही सुप्रसिद्ध लोधेश्वर महादेवा धाम में कांवरियां पहुँचने लगे है। हर-हर बम बम भोले के गगनभेदी जयघोष के बीच कांवरिए नाचते-गाते, भोले की भक्ति में लीन होकर मंदिर गर्भगृह में पहुंच रहे हैं और विधि-विधान से लोधेश्वर महादेव का गंगाजल से जलाभिषेक व दर्शन-पूजन कर रहे हैं।धाम पहुंचने पर कांवरिए सबसे पहले मंदिर परिसर में स्थापित त्रिशूल में अपनी कांवर स्पर्श कराते हैं, इसके बाद गंगाजल अर्पित कर भोलेनाथ की आराधना कर अपनी कठिन पदयात्रा को पूर्ण मानते हैं। पूरा मंदिर परिसर शिवमय वातावरण में डूबा नजर आ रहा है।उन्नाव जनपद के फतेहपुर, खुशहालगंज सहित आसपास के क्षेत्रों से कांवरियों के जत्थे लोधेश्वर धाम पहुंच रहे हैं। कांवरियों का एक बड़ा दल कानपुर के बिठूर घाट से गंगाजल लेकर करीब 180 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए लोधेश्वर महादेव के दर्शन को निकला। रंग-बिरंगी कांवर, पैरों में घुंघरू, हाथों में रामप्यारी (टेकानी) और साथ में डीजे पर बजते भक्ति गीतों ने पूरे मार्ग को भक्ति मय बना दिया।कांवरिया दल के सदस्यों ने बताया कि वे सभी कानपुर से पैदल यात्रा करते हुए भोले बाबा का जलाभिषेक करने लोधेश्वर धाम पहुंचे हैं। खास बात यह है कि प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी दल में महिलाएं कांवर लेकर पदयात्रा में शामिल हो रही हैं। कांवरियों का कहना है कि भोले बाबा की कृपा से जलाभिषेक के बाद सारी थकान स्वतः दूर हो जाती है और लंबी यात्रा का अहसास तक नहीं होता।कांवरियों ने आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि लोधेश्वर महादेव से सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है। रास्ते में कुछ परेशानियां जरूर आती हैं, लेकिन आस्था के आगे वे सभी बौनी पड़ जाती हैं। यह परंपरा उनके पूर्वजों से चली आ रही है, जिसे वे पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाते आ रहे हैं।कांवरियों ने एक स्वर में कहा जब तक भोले बाबा बुलाते रहेंगे, हम कांवर लेकर आते रहेंगे।































