Skip to main content

Naradsamvad

[post-views]

भारतीय सेना ने जारी किया लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन 2026, अब AI और ड्रोन से लड़ी जाएगी जंग

भारतीय सेना ने 23 अक्टूबर 2026 को अपना नया लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन 2026 जारी किया है। इस नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य सेना को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन आधारित ऑपरेशनों की ओर ले जाना है।

Ad image

रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने नई दिल्ली में आयोजित आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के आखिरी दिन इस रणनीतिक अपडेट का अनावरण किया। इसका लक्ष्य 12 लाख कर्मियों वाली इस विशाल सेना का आधुनिकीकरण करना है।

रक्षा अधिकारियों ने बताया कि यह डॉक्ट्रिन तकनीक आधारित युद्ध के लिए एक रोडमैप की तरह काम करेगा। इसमें Operation Sindoor जैसे हालिया संघर्षों से मिले अनुभवों और सीखों को शामिल किया गया है।

तकनीकी युद्ध कौशल और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन

Operation Sindoor के युद्ध अनुभवों ने यह साफ कर दिया था कि कठिन परिस्थितियों में संचार बनाए रखना और मानवरहित प्रणालियों का प्रबंधन करना कितना जरूरी है। यह नया दस्तावेज मल्टी-डोमेन ऑपरेशनों की ओर बदलाव का खाका तैयार करता है।

ALSO READ  यमन में पकड़ी गई याट पर सवार सभी 14 भारतीय सुरक्षित, होदैदा बंदरगाह के पास मिले

अब कमांडरों को सटीक लक्ष्य साधने (प्रिसिजन टारगेटिंग) और लचीली लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि स्वायत्त प्रणालियां मोर्चे पर अधिक काम करेंगी, लेकिन मानवीय नेतृत्व की भूमिका को बरकरार रखा गया है।

सैन्य प्रशिक्षण में बड़े बदलाव और AI प्रोग्राम

नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए सैनिकों के ट्रेनिंग प्रोग्राम में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। मल्टी-डोमेन ऑपरेशनों के लिए एक नया पांच साल का रोडमैप शुरू किया गया है। अधिकारियों को जटिल निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए तीन स्तर के AI स्किल प्रोग्राम से गुजारा जाएगा।

अब सभी यूनिटों के कर्मियों के लिए ड्रोन ऑपरेशन को एक अनिवार्य सेकेंडरी स्किल बनाया जा रहा है। इस बदलाव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हार्डवेयर की खरीद के साथ-साथ तकनीक को अपनाने की रफ्तार भी बनी रहे।

ALSO READ  भारत में 2027 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जरूरी होगा सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल का इस्तेमाल

विशेषज्ञों का मानना है कि इस डॉक्ट्रिन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सेना मानवीय कमान और मशीनी इंटेलिजेंस के बीच कैसे संतुलन बनाती है। सैन्य विश्लेषकों ने परिचालन प्रभावशीलता के लिए कुछ मुख्य कारक बताए हैं:

  • सैन्य शाखाओं के बीच संयुक्त सेवाओं का सफल एकीकरण।
  • जमीनी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए मजबूत काउंटर-ड्रोन उपाय।
  • यूनिट स्तर पर AI आधारित निर्णय उपकरणों का लगातार कार्यान्वयन।
  • लंबे समय तक चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के दौरान सप्लाई चेन की मजबूती।

क्रियान्वयन की चुनौतियां और भविष्य की तैयारी

इस रोलआउट की शुरुआत के साथ ही सैन्य नेतृत्व के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां भी आ रही हैं। पूरे बल में ड्रोन ट्रेनिंग प्रोग्राम को लागू करने की सटीक समयसीमा को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं।

ALSO READ  भारत के आठ मुख्य उद्योगों के उत्पादन में रिकॉर्ड उछाल, विकास दर बढ़कर 7.9 प्रतिशत हुई

आने वाले महीनों में योजनाकारों का मुख्य ध्यान इन तकनीकी उन्नयन के लिए संसाधनों के आवंटन पर रहने की उम्मीद है। कमांडरों ने अब इन ट्रेनिंग निर्देशों के शुरुआती चरण पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है।

जैसे-जैसे यह डॉक्ट्रिन अपने परिचालन चरण में जाएगा, नए AI सिस्टम और ड्रोन प्लेटफॉर्म की खरीद में तेजी आएगी। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन बदलावों से उन विरोधियों के खिलाफ राष्ट्रीय निवारण (deterrence) मजबूत होगा, जो भारतीय सैन्य क्षमताओं में हो रहे इन बदलावों पर नजर रख रहे हैं।

अन्य खबरे

गोल्ड एंड सिल्वर

Our Visitors

Home
Account
Cart
Search
error: Content is protected !!