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NMC ने वापस लिए 2023 के मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड रेगुलेशन, कॉलेजों की कागजी कार्रवाई होगी कम

National Medical Commission ने मेडिकल सेक्टर में प्रक्रियाओं की दोहराव को खत्म करने के लिए 2023 के मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड रेगुलेशन को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है। इस नियामक बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेडिकल कॉलेजों के लिए नियमों के पालन का बोझ कम हो सके।

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इस कदम से संस्थानों की निगरानी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आएगा, लेकिन कॉलेजों के लिए अनुपालन की प्रक्रिया अब आसान हो जाएगी। गज़ट में 14 अक्टूबर 2026 के आसपास प्रकाशित आधिकारिक सूचनाओं के जरिए 2023 के इन नियमों को हटाने की पुष्टि की गई है।

अकादमिक मानकों की निरंतरता को लेकर उठ रहे सवालों को दूर करने के लिए कमीशन ने 23 अक्टूबर 2026 को और स्पष्टीकरण जारी किए। Times of India, India Today और Jagran Josh की रिपोर्टों में यह बताया गया है कि सरकार ने मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं की है।

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निगरानी और निरीक्षण की व्यवस्था

रेगुलेटर ने साफ किया है कि निगरानी के मौजूदा तंत्र मजबूत हैं और कानूनी रूप से बाध्यकारी बने रहेंगे। National Medical Commission Act की संबंधित धाराओं के तहत Annual Disclosure Reports जमा करना अभी भी एक अनिवार्य आवश्यकता बनी हुई है।

कमीशन ने पुष्टि की है कि मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण का काम बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। इसमें अचानक होने वाले सरप्राइज विजिट भी शामिल हैं, जिनके वर्तमान शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

जो कार्रवाई पहले ही इन नियमों के तहत संस्थानों के खिलाफ शुरू की जा चुकी थी, वे अब भी मान्य रहेंगी। नियमों के वापस लिए जाने से पुरानी कार्रवाइयों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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संस्थानों और फैकल्टी पर नियंत्रण

Undergraduate और Postgraduate Medical Education Boards के साथ-साथ Medical Assessment and Rating Board के पास कॉलेजों, छात्रों और फैकल्टी सदस्यों पर पूरा अधिकार बना हुआ है। फैकल्टी रेशियो, फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और पेशेंट-लोड स्टैंडर्ड से जुड़ी नियामक आवश्यकताएं सख्ती से लागू रहेंगी।

नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम निगरानी से पीछे हटना नहीं है, बल्कि मौजूदा ढांचे का युक्तिकरण है। इससे पहले न्यायपालिका ने भी कुछ टिप्पणियां की थीं, जिसके बाद कमीशन ने अपनी ओवरलैपिंग रिन्यूअल प्रक्रियाओं की समीक्षा की।

समानांतर मूल्यांकन प्रणाली को हटाने से अब रेगुलेटर प्राथमिक अधिनियम द्वारा निर्धारित मुख्य आवश्यकताओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएगा। इसके फायदों की सूची नीचे दी गई है:

  • मेडिकल कॉलेजों को प्रशासनिक कागजी कार्रवाई में कमी मिलेगी।
  • सालाना रिन्यूअल की जटिल प्रक्रिया अब सरल हो जाएगी।
  • Annual Disclosure Reports के जरिए सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा के लिए जरूरी सुरक्षा बनी रहेगी।
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भविष्य की योजनाएं और रिपोर्टिंग

स्टेकहोल्डर्स के बीच अभी भी इस बात को लेकर सवाल हैं कि संशोधित प्रणाली के तहत निरीक्षण की फ्रीक्वेंसी यानी अंतराल कैसे बदलेगा। हालांकि, कॉलेजों से उम्मीद की जाती है कि वे अपनी रिपोर्टिंग जमा करना जारी रखें क्योंकि कमीशन ने अपना वर्तमान मॉनिटरिंग शेड्यूल बरकरार रखा है।

Medical Assessment and Rating Board सभी मेडिकल संस्थानों में नियमों के पालन की निगरानी करना जारी रखेगा। कमीशन इस नवीनतम पॉलिसी अपडेट के प्रभाव की निगरानी करेगा और भविष्य में इन प्रशासनिक ढांचों में बदलाव संभव हो सकते हैं।

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