विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 23 अक्टूबर 2026 को बाकू का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अजरबैजान के नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय चर्चा करना था ताकि दोनों देशों के बीच ऊर्जा और व्यापार सहयोग को बढ़ाया जा सके।
यह बातचीत दोनों देशों के बीच रिश्तों को फिर से तय करने की एक रणनीतिक कोशिश है। पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों और पाकिस्तान पर अजरबैजान के सार्वजनिक रुख को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव रहा था।
एस जयशंकर ने राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और विदेश मंत्री जेहुन बायरमोव से मुलाकात की। इस बैठक में साझेदारी के लिए भविष्य का रास्ता तैयार करने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने कनेक्टिविटी, निवेश और पर्यटन में समान हितों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित किया।
ऊर्जा सुरक्षा और निवेश पर जोर
इन चर्चाओं का लक्ष्य व्यावहारिक आर्थिक नजरिए से जटिल क्षेत्रीय संबंधों को संभालना था। इस नए राजनयिक प्रयास में ऊर्जा सुरक्षा सबसे प्राथमिक फोकस बना हुआ है।
एस जयशंकर ने ONGC Videsh की मौजूदा उपस्थिति पर जोर दिया। ONGC Videsh ने अजरबैजान के चिराग गुनाशली तेल क्षेत्रों और बाकू त्बिलिसी जेयहान पाइपलाइन में 1.2 बिलियन डॉलर से अधिक की हिस्सेदारी रखी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वित्तीय निवेश दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को गहरा करने के लिए एक मजबूत आधार का काम करता है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में आपसी विश्वास और साझेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
आर्थिक गलियारे और रणनीतिक बदलाव
दोनों सरकारें इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर अपने प्रयासों का समन्वय कर रही हैं। यह प्रोजेक्ट भारत के लिए यूरेशियाई बाजारों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
इस कॉरिडोर के जरिए अजरबैजान भी अपने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की सूची में विविधता लाने में मदद पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक गलियारों को प्राथमिकता देना विश्वास बहाली का एक व्यावहारिक तरीका है।
इससे राजनीतिक मतभेदों को तुरंत सुलझाए बिना भी रिश्तों को बेहतर बनाया जा सकता है। भारत को इससे बेहतर ऊर्जा विकल्प और बेहतर लॉजिस्टिक रूट मिलेंगे, जबकि अजरबैजान क्षेत्रीय शक्तियों के बीच संतुलन बनाना चाहता है। इन हितों को संतुलित करने के लिए एक स्थिर दृष्टिकोण की जरूरत है, जिस पर बाकू और नई दिल्ली दोनों सहमत दिखते हैं।
द्विपक्षीय जुड़ाव के मुख्य बिंदु
वर्तमान द्विपक्षीय जुड़ाव में कई महत्वपूर्ण हितधारक और वित्तीय प्रतिबद्धताएं शामिल हैं, जिन्हें इस प्रकार देखा जा सकता है:
- 23 अक्टूबर 2026 की बैठकों के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया।
- अजरबैजान सरकार का प्रतिनिधित्व राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और विदेश मंत्री जेहुन बायरमोव ने किया।
- ONGC Videsh क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे में 1.2 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश पोर्टफोलियो रखता है।
- संयुक्त कनेक्टिविटी प्रयासों के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर प्राथमिकता बना हुआ है।
भविष्य की प्रगति अब इस बात पर निर्भर करेगी कि उच्च स्तरीय आदान-प्रदान के माध्यम से इन क्षेत्रों में चर्चा की गई बातों को कैसे लागू किया जाता है। अधिकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी करेंगे ताकि यह देखा जा सके कि क्या गहरे निवेश चक्र संभव हैं।
हालांकि आने वाली बैठकों के लिए कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन वर्तमान माहौल यह बताता है कि दोनों पक्ष एक निरंतर पेशेवर संवाद के लिए प्रतिबद्ध हैं।































