भारत के आठ मुख्य उद्योगों ने सितंबर 2026 के दौरान वर्तमान डेटा सीरीज में अपनी अब तक की सबसे मजबूत बढ़त दर्ज की है। Ministry of Commerce and Industry द्वारा 21 अक्टूबर को जारी किए गए प्रोविजनल डेटा के अनुसार, Index of Core Industries में पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 7.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इस प्रदर्शन को इस क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। Press Information Bureau की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में यह इंडेक्स 118.3 तक पहुंच गया है, जो एक साल पहले 109.6 दर्ज किया गया था।
इन मुख्य उद्योगों के दायरे में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क शामिल हैं। ये सभी सेक्टर मिलकर राष्ट्रीय औद्योगिक गतिविधि की रीढ़ बनाते हैं और Index of Industrial Production के कुल वजन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं।
विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के प्रदर्शन का विवरण
इस अवधि के दौरान अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में विकास की रफ्तार अलग-अलग रही। The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, लौह अयस्क (Iron ore) ने सबसे अधिक 18.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़त बनाई, जबकि बिजली क्षेत्र 11.4 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
कोयले के उत्पादन में 10.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछले साल की गिरावट के बाद एक बड़ा सुधार है और 13 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। रिफाइनरी उत्पाद भी वर्तमान बेस वर्ष के तहत सीरीज के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए, जिनमें 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई।
इसके अलावा, सीमेंट उत्पादन में 9.8 प्रतिशत और स्टील उत्पादन में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। Business Standard के रिकॉर्ड बताते हैं कि कोयला, रिफाइनरी उत्पाद, स्टील और लौह अयस्क ही इस समग्र विकास के मुख्य चालक रहे हैं।
कुछ सेक्टरों में आई गिरावट और चुनौतियां
सरकार द्वारा ट्रैक किए गए सभी सेक्टर इस सफलता का हिस्सा नहीं रहे। कच्चे तेल (Crude oil) के उत्पादन में 1.4 प्रतिशत की कमी आई, जबकि प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 4.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
Mint के आंकड़ों के अनुसार, उर्वरक (Fertilisers) क्षेत्र में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई, जहां उत्पादन 11.7 प्रतिशत तक गिर गया। यह डेटा दिखाता है कि रिकवरी मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विशेष सेगमेंट तक ही सीमित है।
विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि मुख्य आंकड़ा डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग के लिए उत्साहजनक है, लेकिन उर्वरक और ऊर्जा क्षेत्र की कमजोरी पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
विकास की रफ्तार और भविष्य का अनुमान
अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि के लिए संचयी विकास दर (cumulative growth) 5.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि के दौरान दर्ज की गई 2.5 प्रतिशत की विकास दर से दोगुने से भी अधिक है।
हाल के महीनों में इन पैमानों में लगातार ऊपर की ओर संशोधन देखे गए हैं। Department for Promotion of Industry and Internal Trade ने अगस्त 2026 के अंतिम विकास आंकड़े को 4.8 प्रतिशत के शुरुआती अनुमान से बढ़ाकर 5.9 प्रतिशत कर दिया है।
अब नीति निर्माताओं के सामने इस ट्रेंड की स्थिरता को लेकर कई सवाल हैं। वे यह देखना चाहते हैं कि क्या यह रफ्तार अक्टूबर और नवंबर तक बनी रहती है या यह उछाल केवल अनुकूल बेस इफेक्ट का परिणाम था।
उद्योग विशेषज्ञ इस बात पर भी नजर रख रहे हैं कि उर्वरकों के उत्पादन में आई गिरावट रबी सीजन की उपलब्धता और कीमतों को कैसे प्रभावित करेगी। CNBC-TV18 के अनुसार, सरकार आने वाले हफ्तों में अक्टूबर के प्रोविजनल डेटा के साथ सितंबर के अंतिम आंकड़े जारी करेगी।
बाजार के प्रतिभागी इन आगामी आंकड़ों के आने के बाद निवेश चक्र की मजबूती पर और अधिक स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं। अब कई हितधारकों का ध्यान इस बात पर है कि क्या वर्तमान औद्योगिक उत्पादन देश भर में व्यापक विनिर्माण सफलता में बदल सकता है।









