रिपोर्ट/नारद संवाद न्यूज़ एजेंसी


रामनगर, बाराबंकी। ज्येष्ठ माह के तीसरे बड़े मंगल पर क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय माहौल में रंगा नजर आया। कस्बे से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक हनुमान मंदिरों एवं विभिन्न धार्मिक स्थलों पर विशाल भंडारों का आयोजन किया गया, जहां सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही। भक्तों ने हनुमान मंदिरों में पूजा-अर्चना कर प्रसाद ग्रहण किया और सुख-समृद्धि की कामना की।कस्बा रामनगर के मोहल्ला धमेड़ी स्थित तीन जियो ऑफिस के पास दुर्विजय कांत शुक्ला उर्फ गुल्ली के संयोजन में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। यहां श्रद्धालुओं को पूड़ी-सब्जी का प्रसाद वितरित किया गया। भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में राजू शुक्ला, आलोक, नवनीत, अनुपम, आदर्श, संगम और आनंद ने सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं पप्पू शुक्ला, रमेश शुक्ला,विकास, प्रशांत तिवारी, सूरज, अमित, रवि और अंकित सहित तमाम लोगों ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।भंडारे के दौरान पूरे क्षेत्र में जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालु कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण करते नजर आए। आयोजकों द्वारा पेयजल एवं बैठने की व्यवस्था भी की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।इसी क्रम में सीहामऊ स्थित प्रसिद्ध मोती पुरी बाबा मंदिर पर भी भंडारे का आयोजन किया गया। आयोजक ओमप्रकाश शर्मा ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित कर सेवा भाव का परिचय दिया। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही। श्रद्धालुओं ने मंदिर में माथा टेककर परिवार की खुशहाली की कामना की।वहीं समाजसेवी राहुल मिश्रा द्वारा भी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण कराया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने भंडारे में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया और आयोजकों की सराहना की।इसके अतिरिक्त बिछलखा स्थित मलखे बाबा स्थान पर भी भंडारे का आयोजन किया गया, जहां दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक आयोजनों के चलते पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का क्रम चलता रहा।तीसरे बड़े मंगल के अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। आयोजकों ने बताया कि बड़े मंगल पर भंडारे की परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें क्षेत्रीय लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और सेवा कार्य में सहयोग करते हैं।































