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Pakistan Gold Reserve Discovery Facts; India | PAK Economic Impact | आज का एक्सप्लेनर: भारत से बहकर पाकिस्तान पहुंचा सोना, 80 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपए है कीमत; क्या अब बदल जाएंगे पड़ोसी देश के हालात

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Naradsamvad - Narad news Agency
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कर्ज का बोझ, नकदी की किल्लत और बेतहाशा महंगाई से जूझ रहे पाकिस्तान ने सिंधु नदी में करीब 28 लाख तोला गोल्ड रिजर्व खोजा है। इसकी कीमत करीब 80 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपए है। भारत की करेंसी में करीब 25 हजार करोड़। अब इसके खनन की तैयारी चल रही है।

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इस सोने का भारत से क्या कनेक्शन है, क्या इससे पड़ोसी देश के हालात बदलेंगे और पाकिस्तान में पहले भी खोजे गए करोड़ों टन गोल्ड रिजर्व का क्या हुआ; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: पाकिस्तान में कहां और कैसे खोजा गया गोल्ड रिजर्व?

जवाब: सबसे पहले 10 जनवरी 2025 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार के खनन मंत्री रहे इब्राहिम हसन मुराद ने X पर एक पोस्ट में दावा किया कि अटक में सिंधु और काबुल नदी के संगम पर सोने के भंडार मौजूद हैं।

पाकिस्तानी मीडिया से बात करते हुए हसन ने कहा कि जब वह मंत्री थे तो ऐसी जानकारी आई थी कि सिंधु के किनारे बसे अटक शहर के कुछ लोग मशीनों से खुदाई कर रहे हैं। जब लोगों से पूछताछ की गई तो पता चला कि वे यहां सोना तलाश कर रहे हैं। उसके बाद इलाके में धारा 144 लागू करके सोना खोजने के लिए खुदाई पर पाबंदी लगा दी गई थी।

अटक और आसपास के इलाके में लोग सिंधु नदी की तलछट से सोना निकालने की कोशिश करते हैं।

अटक और आसपास के इलाके में लोग सिंधु नदी की तलछट से सोना निकालने की कोशिश करते हैं।

इसके बाद 20 जनवरी 2025 को पंजाब की सरकार के मौजूदा खनन मंत्री शेर अली गोरचानी ने भी पंजाब के अटक जिले में 70 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपए कीमत के सोने के भंडार मौजूद होने का दावा किया। गोरचानी के मुताबिक, अटक में 32 किलोमीटर के इलाके में 28 लाख तोला सोना मौजूद है।

सवाल-2: पाकिस्तान के अटक में मिले इस गोल्ड रिजर्व का भारत से क्या कनेक्शन है?

जवाब: माना जाता है कि 5 करोड़ साल पहले भारत और यूरेशिया के नीचे की टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव से हिमालय बनना शुरू हुआ था। टेक्टोनिक प्लेटों की एक्टिविटी के दौरान ही चट्टानों से सोना और बाकी धातुएं और मिनरल्स अलग हुए।

तिब्बत के पहाड़ों में मानसरोवर झील से निकलने वाली हिमालयी नदी सिंधु में ये धातुएं, चट्टानों के टुकड़े और गोल्ड जैसे बाकी मिनरल्स के कण भी बहते चलते हैं। हजारों किलोमीटर पहाड़ी इलाकों का सफर करके सिंधु जब मैदानी इलाकों या घाटियों में पहुंची तो उसकी गति धीमी हो गई।

धीमी गति के चलते इकठ्ठा होकर वजनदार हो चुके ये कण भी नदी की तली में बैठ जाते हैं। इसे ‘प्लेसर डिपॉजिट’ या ‘नदी की तलछट’ या ‘अवसादी चट्टान’ कहा जाता है। पहाड़ी चट्टानों से धातुओं के अलग होने और उसके प्लेसर डिपॉजिट बनने की इस प्रक्रिया में हजारों-लाखों साल लगते हैं।

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सिंधु नदी के प्लेसर डिपॉजिट में बाकी धातुओं के साथ ही कुछ मात्रा में सोना भी मौजूद है। इस सोने को ‘प्लेसर गोल्ड’ कहते हैं। यही प्लेसर गोल्ड अब पाकिस्तान के पंजाब के अटक में मिलने का दावा किया जा रहा है, जहां मैदानी इलाका होने की वजह से सिंधु नदी धीमी हो जाती है।

सवाल-3: क्या सिंधु नदी का ये सोना भारत में नहीं निकाला जा सकता?

जवाब: दरअसल, सिंधु नदी मानसरोवर से निकलने के बाद उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती है और पाकिस्तान से पहले भारत के लेह और लद्दाख के इलाके में दाखिल होती है। यहां यह लेह से करीब 150 किलोमीटर दूर जंस्कर नाम की सहायक नदी से मिलती है।

भारत में करीब 1000 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद सिंधु पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगिट और बाल्टिस्तान में घुसती है, और उसके बाद पंजाब के मैदानी इलाकों में पहुंचती है।

लद्दाख से गुजरने के दौरान भी सिंधु में सोने के कण मौजूद हो सकते हैं, लेकिन वहां पहाड़ी रास्तों के चलते नदी का बहाव तेज है, इसलिए बहुत कम प्लेसर डिपॉजिट बन पाता है। इसके अलावा दुर्गम पहाड़ी रास्तों के चलते लद्दाख में प्लेसर गोल्ड निकालने की कोशिश करना व्यावहारिक नहीं है।

सवाल-4: क्या अटक में गोल्ड रिजर्व मिलने के कोई पुख्ता सबूत हैं या सिर्फ हवाई बातें हैं?

जवाब: पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ पाकिस्तान (GSP) ने अटक में 25 किलोमीटर के इलाके से 500 नमूने इकट्ठे किए, इनमें सोने की मौजूदगी साबित हुई।

इब्राहिम हसन मुराद ने GSP की साल 2022-23 की एक रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया था। GSP की इस रिपोर्ट का नाम था- ‘अटक जिले में सिंधु नदी पर प्लेसर गोल्ड का मूल्यांकन’।

रिपोर्ट में लिखा है, ‘पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाकों में तांबे और सोने की मौजूदगी पता लगाई जा रही है। अटक जिले और खैबर पख्तूनख्वाह के मानसहरा जिले में भी जियोकेमिकल तकनीक से प्लेसर गोल्ड और दूसरी धातुओं की का पता लगाने की कोशिश जारी है।’

अटक में सोने का पता लगाने के लिए किए गए सर्वे की रिपोर्ट पाकिस्तान सरकार को भेज दी गई है। वहीं खैबर पख्तूनख्वाह में 6,000 वर्ग किलोमीटर के इलाके की जियोलॉजिकल मैपिंग की जानी है।

GSP ने एक ऑफिसर ने डॉन से कहा, ‘हां हमने एक रिसर्च की है और अपनी रिपोर्ट पंजाब माइंस और मिनरल्स डिपार्टमेंट को भेज दी है। हम रिपोर्ट पर चर्चा नहीं कर सकते, क्योंकि यह अब डिपार्टमेंट की प्रॉपर्टी है।’

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BBC की एक रिपोर्ट में GSP के एक अधिकारी ने कहा कि सिंध की तहसील ‘नगर पारकर’ में भी सोने के भंडार खोजे गए हैं, इसकी रिपोर्ट सरकार को भिजवा दी गई है। डॉन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि इन सोने के भंडारों से निकासी की योजना बन रही है, जिसे परियोजना को सरकारी कंपनी नेशनल इंजीनियरिंग सर्विसेज पाकिस्तान (NESPAK) और पंजाब के खान और खनिज विभाग चलाएंगे।

सवाल-5: पाकिस्तान में मिले इस सोने को कब तक और कैसे निकाला जाएगा?

जवाब: कराची यूनिवर्सिटी के जियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अदनान खान एक इंटरव्यू में बताते हैं कि सिंधु नदी में उत्तरी इलाकों से लेकर अटक तक सोना निकालने के लिए लोगों ने घरेलू उद्योग लगा रखे हैं, लेकिन ये गोल्ड रिजर्व इतने बड़े नहीं हैं कि इनसे सोना निकालने के लिए सरकार औपचारिक तौर पर उद्योग लगाए या खदान तय करके खनन कंपनियों को उसका ठेका दे।

सिंधु के किनारे छोटी मशीनें लगाकर सोना निकालने की कोशिश करते लोग।

सिंधु के किनारे छोटी मशीनें लगाकर सोना निकालने की कोशिश करते लोग।

बेनजीर भुट्टो यूनिवर्सिटी के डॉक्टर एहतेशाम इस्लाम भी कहते हैं कि तांबे के साथ अक्सर एसोसिएट मिनरल के तौर पर सोना भी निकलता है, लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम होती है। अगर तांबे के सौ टुकड़े मिलेंगे तो उसके साथ केवल 0.1 या 0.2% ही सोना मिलने की संभावना होती है। अटक जैसे उत्तरी इलाकों में सोना बलूचिस्तान के कुछ इलाकों में मिलने वाले सोने की तुलना में बहुत कम है।

डॉन के मुताबिक, कुछ समय पहले खनन विभाग ने 500 करोड़ रुपए की लागत से कुछ खदानें लीज पर दी थीं। 2024 में भी प्लेसर गोल्ड निकालने के लिए 4 गोल्ड ब्लॉक यानी सोने की खदानें लीज पर दी गई थीं। हालांकि, ये नौशेरा और आसपास के इलाके में थीं। बाकी इलाकों में 13 गोल्ड ब्लॉक की नीलामी की कोशिश की गई, लेकिन बोली लगाने के लिए कोई कंपनी नहीं आई।

वहीं नेशनल इंजीनियरिंग सर्विसेज पाकिस्तान (NESPAK) नाम की पाकिस्तानी सरकारी कंपनी और खनन विभाग ने अटक के इलाके में 9 ब्लॉक की नीलामी के लिए खनन कंपनियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए हैं। अटक में मिले सोने को लेकर फिलहाल इतनी ही जानकारी सामने आई है।

सवाल-6: क्या अटक में मिले गोल्ड रिजर्व से पाकिस्तान के हालात बदलेंगे?

जवाब: पाकिस्तान आर्थिक रूप से कंगाल होने की कगार पर है। पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में एक महीने के आयात का भी पैसा नहीं बचा। 1 डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपए की कीमत 280 रुपए हो गई है। देश की आमदनी का बड़ा हिस्सा कर्ज के ब्याज में खप रहा है। बेरोजगारी दर 8% के पार हो गई है। ऐसे में क्या इस गोल्ड रिजर्व से हालात बदलेंगे?

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सीनियर इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल कहते हैं कि अटक में 25 हजार करोड़ रुपए का सोना मिलने से भी पाकिस्तान को कोई खास फायदा नहीं होगा। वह इसके पीछे तीन तर्क देते हैं…

  • सोना निकालने के लिए पाकिस्तान को एक व्यवस्था बनानी होगी, लेकिन वहां फैली राजनीतिक अस्थिरता के चलते खनन सहित दूसरे सभी उद्योग खत्म हो रहे हैं।
  • पाकिस्तान को इससे पहले भी कई मौके मिले हैं, उसके पास पर्याप्त नेचुरल रिसोर्स और खेती लायक जमीन भी है, लेकिन अस्थिर सरकारें, इन रिसोर्सेज पर ध्यान नहीं देतीं। वहां भयंकर करप्शन है। चीन पाकिस्तान में निवेश करना चाहता था, अब वह पीछे हट रहा है।
  • किसी भी देश का सोने का भंडार बढ़ने से ग्लोबल लेवल पर उसकी साख बढ़ती है। पाकिस्तान पर 131.1 बिलियन डॉलर यानी 11 लाख करोड़ भारतीय रुपए के बराबर विदेशी कर्ज है। उसे अपनी इकोनॉमी चलाने के लिए और कर्ज की जरूरत है। अगर पाकिस्तान पूरा सोना निकाल सके तो ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अमेरिका वगैरह से और कर्ज मांग पाएगा।

सवाल-7: पाकिस्तान में पहले भी करोड़ों टन गोल्ड रिजर्व मिलने का दावा किया गया, उसका क्या हुआ?

जवाब: कहा जाता है कि बलूचिस्तान के चागी जिले में तांबे और सोने की दुनिया की सबसे बड़ी खदानें हैं। पाकिस्तान के खनन विभाग ने सऊदी अरब के फ्यूचर मिनरल्स फोरम में एक रिपोर्ट पेश की थी। इसके मुताबिक, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह प्रांतों में 1.6 अरब टन यानी 1600 करोड़ किलो सोने के भंडार हैं। इनमें से हर साल 1500 से 2000 किलो सोना निकाला जा सकता है। हालांकि, अभी तक पाकिस्तान में बड़ी मात्रा में सोने का खनन नहीं हो सका।

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