भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए गाजियाबाद पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पुराना नाम ट्विटर) को भेजे गए एक नोटिस को रद्द कर दिया है। इस नोटिस के जरिए पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय का विस्तृत डिजिटल डेटा मांगा था।
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने की। कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई को ‘ओवरकिल’ यानी जरूरत से ज्यादा सख्त बताया। कोर्ट ने साफ कहा कि जांच की शक्तियों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति के निजता के अधिकार (राइट टू प्राइवेसी) का उल्लंघन करने के लिए नहीं किया जा सकता।
डिजिटल डेटा मांगने पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
यह पूरा मामला 18 अगस्त 2026 को हुई एक कथित रोड रेज घटना से जुड़ा है। गाजियाबाद पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 का इस्तेमाल करते हुए ‘X’ से डिजिटल रिकॉर्ड मांगे थे। पुलिस ने 1 जून 2026 से लेकर 22 अगस्त 2026 तक के रिकॉर्ड की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि किसी कथित घटना से महीनों पहले के कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की मांग करना जांच अधिकारियों की शक्तियों का अत्यधिक उपयोग है। अदालत ने सख्त आदेश दिया कि इस नोटिस या किसी अन्य तरीके से प्राप्त किसी भी जानकारी का इस्तेमाल अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ नहीं किया जाएगा।
सरकार की दलील और निजता का अधिकार
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) नियमों का हवाला दिया था। हालांकि, कोर्ट की बेंच ने राज्य की जांच शक्ति और उसे लागू करने के तरीके के बीच एक स्पष्ट अंतर बताया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित न हो जाए कि अन्य विकल्प नाकाफी हैं, तब तक किसी की व्यक्तिगत या गोपनीय जानकारी तक नहीं पहुँचा जा सकता। अदालत ने जांच पत्रकारों के निजता के अधिकारों और राज्य की जांच प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
FIR की वजह और कोर्ट के अन्य निर्देश
अभिषेक उपाध्याय की तरफ से वकील प्रदीप राय और अनूप प्रकाश अवस्थी ने कोर्ट में पैरवी की। उन्होंने दलील दी कि यह FIR असल में अयोध्या राम मंदिर में दान के मामले में कथित अनियमितताओं पर की गई उनकी रिपोर्टिंग का बदला लेने के लिए दर्ज कराई गई थी।
अदालत ने नोटिस को रद्द करने के साथ-साथ कुछ और महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए हैं:
- अभिषेक उपाध्याय को गिरफ्तारी से जो अंतरिम सुरक्षा पहले मिली थी, उसे अब स्थायी कर दिया गया है।
- कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस को आदेश दिया है कि उपाध्याय का जब्त किया गया वाहन दो दिनों के भीतर रिलीज किया जाए।

























