सीतापुर के जिला मजिस्ट्रेट डॉ. राजगणपति आर. ने पूर्व अधिशासी अधिकारी (EO) वैभव त्रिपाठी के खिलाफ निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। उन पर वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक कदाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
वैभव त्रिपाठी वर्तमान में गाजियाबाद की लोनी नगर पालिका में तैनात हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने सीतापुर में अपने कार्यकाल के दौरान संपत्ति कर वसूली के कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े सरकारी नियमों का उल्लंघन किया था।
नगर पालिका बोर्ड की मंजूरी के बिना दिया कॉन्ट्रैक्ट
जांच के अनुसार, वैभव त्रिपाठी ने लखनऊ की ज्ञान जियोमेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को संपत्ति कर वसूली का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इस कॉन्ट्रैक्ट को जारी करने के लिए नगर पालिका बोर्ड से अनिवार्य मंजूरी नहीं ली गई थी।
इस समझौते के तहत यह तय किया गया था कि कंपनी के सॉफ्टवेयर के जरिए जितना भी टैक्स वसूला जाएगा, उसका 12.5 प्रतिशत हिस्सा भुगतान के रूप में दिया जाएगा। जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि भुगतान का ऐसा तरीका राज्य के नियमों के खिलाफ है।
सरकारी पोर्टल की अनदेखी और नियमों का उल्लंघन
डीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश की किसी भी अन्य नगर पालिका संस्था में इस तरह की भुगतान व्यवस्था लागू नहीं है। अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि डेटा संग्रह के लिए राज्य सरकार के पास पहले से ही ई-नगर सेवा पोर्टल मौजूद है।
इस सरकारी पोर्टल की मौजूदगी के कारण निजी कंपनी के साथ किए गए इस कॉन्ट्रैक्ट की कोई जरूरत नहीं थी और यह पूरी तरह अनावश्यक था। इस कदम को सरकारी निर्देशों की जानबूझकर की गई अनदेखी माना गया है।
तबादली वाले दिन ही जारी किया गया वर्क ऑर्डर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैभव त्रिपाठी ने ज्ञान जियोमेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड को 1 जून, 2026 को वर्क ऑर्डर जारी किया था। यह वही दिन था जब उन्हें लोनी ट्रांसफर होने के बाद सीतापुर से कार्यमुक्त किया गया था।
जिला मजिस्ट्रेट ने इस पूरे मामले की औपचारिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के निकाय निदेशालय के निदेशक और शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भेजी है। उन्होंने इस घटना को अनुशासनहीनता और सरकारी निर्देशों का सीधा उल्लंघन बताया है।

























