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ब्रिटिश आर्मी के कैम्ब्रियन पेट्रोल 2026 में भारतीय सेना की असम रेजिमेंट ने जीता गोल्ड मेडल

भारतीय सेना की असम रेजिमेंट के सैनिकों ने वेल्स में आयोजित एक्सरसाइज कैम्ब्रियन पेट्रोल 2026 में गोल्ड मेडल जीता है। भारतीय सेना ने 13 अक्टूबर 2026 को इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। यह दुनिया की सबसे कठिन सैन्य पेट्रोलिंग प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है।

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इस प्रतियोगिता का आयोजन ब्रिटिश आर्मी द्वारा 2 अक्टूबर से 13 अक्टूबर 2026 के बीच किया गया। इस इवेंट को हेडक्वार्टर 160थ वेल्श ब्रिगेड के माध्यम से संचालित किया गया था।

ब्रिटिश आर्मी के आंकड़ों के अनुसार, 1959 में शुरू हुई इस प्रतियोगिता का यह अब तक का सबसे बड़ा संस्करण था। इस आयोजन में कुल 140 पेट्रोल प्रविष्टियों ने हिस्सा लिया था।

प्रतियोगिता में शामिल टीमें और समर्थन

इस बड़े मुकाबले में 75 रेगुलर आर्मी टीमों और 15 रिजर्व यूनिट्स ने भाग लिया। इसके साथ ही 13 यूनिवर्सिटी ऑफिसर ट्रेनिंग कॉर्प्स की टीमें भी इसमें शामिल थीं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 35 पेट्रोल टीमों ने हिस्सा लिया, जबकि दो कंबाइंड ब्रिटिश इंटरनेशनल टीमें भी मौजूद थीं। वेल्श पहाड़ों में इन अभ्यासों को सफल बनाने के लिए 350 से अधिक सपोर्ट कर्मियों ने काम किया।

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असम रेजिमेंट के दल ने विभिन्न देशों की 100 से अधिक टीमों के बीच मुकाबला किया और टॉप 10 में जगह बनाकर गोल्ड मेडल हासिल किया।

कठिन मानक और सैन्य कौशल की परीक्षा

भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि यह मेडल केवल दौड़ में प्रथम आने का पुरस्कार नहीं है। इसके बजाय, पेट्रोल टीमों का मूल्यांकन फील्डक्राफ्ट, नेतृत्व, नेविगेशन और दबाव में प्रदर्शन के तय मानकों के आधार पर किया जाता है।

इस प्रतियोगिता के नियम बहुत सख्त हैं। प्रतिभागियों को लगभग 48 घंटों के भीतर करीब 60 किलोमीटर का कोर्स पूरा करना होता है। ब्रिटिश आर्मी के मुताबिक, हर सैनिक को उबड़-खाबड़ और खड़ी ढलानों वाले इलाकों में 32 किलोग्राम तक का वजन उठाना पड़ता है।

पेट्रोल के दौरान सैनिकों को कई तरह के कठिन कार्य करने होते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • रेकॉनिसेंस (टोह लेना) और रेडियो संचार।
  • कैजुअल्टी इवैक्युएशन यानी घायलों को निकालना।
  • माइनफील्ड्स (बारूदी सुरंगों) से होकर रास्ता बनाना।
  • सिम्युलेटेड केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल या न्यूक्लियर खतरों का सामना करना।
  • क्लोज क्वार्टर कॉम्बैट ड्रिल और खुफिया जानकारी जुटाने के अभ्यास।
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टीमों की क्षमता जांचने के लिए हाल के संस्करणों में आधुनिक ड्रोन सर्विलांस का भी उपयोग किया गया है।

असम रेजिमेंट का इतिहास और पहचान

आधिकारिक तौर पर बटालियन के नाम की पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि, @adgpi द्वारा जारी आधिकारिक फोटो में एक सैनिक के कंधे पर ‘BHAIRAV’ का पैच दिख रहा है, जो असम रेजिमेंट की छठी बटालियन से संबंधित है।

असम रेजिमेंट का इतिहास 15 जून 1941 को शिलॉन्ग से शुरू हुआ था। इसे क्षेत्रीय सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना की बढ़त को रोकने के लिए बनाया गया था।

इस यूनिट ने कोहिमा और जेसामी की रक्षा सहित छह युद्ध सम्मान (बैटल ऑनर्स) हासिल किए हैं। केवल शुरुआती अभियान में ही इसके सैनिकों को 71 वीरता पदक दिए गए थे। यह रेजिमेंट आज भी देश भर में प्रमुख संघर्षों और उग्रवाद विरोधी अभियानों में हिस्सा लेती है।

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विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सैन्य इकाई के लिए इस इवेंट में गोल्ड जीतना एक दुर्लभ उपलब्धि है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार भारत से पहले गोरखा राइफल्स और गढ़वाल राइफल्स ने यह जीत हासिल की थी, जिसका जिक्र द टाइम्स ऑफ इंडिया और द वीक जैसे माध्यमों में किया गया है।

असम रेजिमेंट की यह सफलता उनके विशेष प्रशिक्षण तरीकों की प्रभावशीलता को दर्शाती है। फिलहाल हिस्सा लेने वाली सेनाओं ने स्कोर की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की है। भारतीय सेना के आने वाले ट्रेनिंग साइकिल में इस वेल्श अभ्यास से मिले सबक शामिल किए जाएंगे। 2027 संस्करण के लिए आवेदन अगले साल की शुरुआत में खुलेंगे।

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