रिपोर्ट/विवेक शुक्ला
रामनगर (बाराबंकी)। क्षेत्र के भरसंवा गांव में इलाज के अभाव में एक 32 वर्षीय किडनी रोगी की बीते 23 मार्च को घर पर ही मौत हो गई। परिजनों के अनुसार आर्थिक तंगी के चलते वह महंगा निजी इलाज नहीं करा सके, जबकि सरकारी स्तर पर भी उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल सका।मृतक राजित राम प्रजापति लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके पिता बरसाती प्रजापति ने बताया कि 11 फरवरी को तबीयत बिगड़ने पर वह बेटे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर ले गए, जहां से चिकित्सकों ने जिला अस्पताल बाराबंकी रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने लखनऊ के लोहिया अस्पताल या मेडिकल कॉलेज जाने की सलाह दी।परिजनों के मुताबिक, सरकारी एंबुलेंस से मरीज को लोहिया अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वहां बेड न होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया और मेडिकल कॉलेज जाने को कहा गया। बरसाती प्रजापति का आरोप है कि काफी अनुरोध के बावजूद अस्पताल स्टाफ ने कोई सहायता नहीं की। प्रक्रिया और रास्ते की जानकारी न होने के कारण वह गंभीर हालत में बेटे को वापस घर ले आए।उन्होंने बताया कि बेटे के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने और भर्ती कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, विधायक सहित संबंधित अधिकारियों को पंजीकृत पत्र भेजे गए तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली।आखिरकार इलाज के अभाव में 23 मार्च को राजित राम ने दम तोड़ दिया। उनकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पीछे छूटे छोटे-छोटे बच्चों के पालन-पोषण की चिंता परिजनों को सता रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय बताई जा रही है।































