Skip to main content

Naradsamvad

पांच साल से गंदे पानी में जीने को मजबूर ग्रामीण, विकास योजनाएं बनीं शोपीस

Vivek Shukla
3 Min Read

रिपोर्ट/नारद संवाद न्यूज़ एजेंसी

लाखो की लागत से गाँव में बनाएं गए कूड़ा घर की तस्वीर 

Ad image

ग्राम जोरौंडा के मार्गों पर जमा गंदा पानी।

रामनगर, बाराबंकी। विकास खंड सूरतगंज की ग्राम पंचायत जुरौंडा में ग्रामीण पिछले पांच वर्षों से बदहाल व्यवस्थाओं के बीच जीवन यापन करने को मजबूर हैं। गांव में सरकारी विकास योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में भ्रष्टाचार और अनदेखी के चलते मूलभूत सुविधाएं भी लोगों को नहीं मिल पा रही हैं।ग्रामीणों के अनुसार गांव के मुख्य मार्ग पर पिछले पांच वर्षों से शौचालयों का गंदा पानी भरा रहता है। इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लाखों रुपये की लागत से पानी की बड़ी टंकी का निर्माण कराया गया, लेकिन आज तक ग्रामीणों को नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं मिल सकी। कभी-कभार टंकी चालू भी की जाती है तो पाइपलाइन लीकेज के कारण जगह-जगह जलभराव हो जाता है।कूड़ा निस्तारण के लिए बनाए गए कूड़ाघर का भी अब तक संचालन शुरू नहीं हो सका है। कूड़ा उठाने के लिए खरीदा गया रिक्शा भी उपयोग में नहीं लाया गया। वहीं गांव में निर्मित दिव्यांग शौचालय अब तक विद्यालय को हस्तांतरित नहीं किया गया है। पंचायत सचिवालय भवन भी उपयोग के अभाव में शोपीस बनकर रह गया है।ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सहायक केवल ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित हैं और सचिवालय में नियमित कार्य नहीं होता। लोगों का कहना है कि जिन योजनाओं के लिए धन आवंटित हुआ, उनका सही उपयोग नहीं किया गया और कागजी कार्रवाई के जरिए सरकारी धन का बंदरबांट किया गया।गांव का सामुदायिक शौचालय भी बदहाल स्थिति में पड़ा है। तालाबों में जलभराव की समुचित व्यवस्था न होने से पशु-पक्षियों को भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष तालाबों में पानी भराने के नाम पर केवल कागजी खानापूरी कर धन निकाला जाता रहा।ग्रामीणों ने बताया कि तहसील दिवस से लेकर जिलाधिकारी तक कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।ग्रामीण अशोक कुमार सिंह ने कहा कि यदि शासन स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो मामले की जांच और न्यायोचित कार्रवाई के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली जाएगी।

ALSO READ  बाराबंकी के त्रिलोकपुर में बुखार का कहर, एक की मौत और 50 से ज्यादा लोग बीमार
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Search
अपना ज़िला चुनें
error: Content is protected !!