रिपोर्ट/विवेक शुक्ला
रामनगर (बाराबंकी)। प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक मादा बंदर की जान वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की तत्परता से बच गई। समय पर उपचार मिलने से मादा बंदर को राहत मिली, हालांकि उसने मृत शावक को जन्म दिया।क्षेत्र के बिछ्लखा गांव में निवासी पंकज कुमार मिश्रा उर्फ लालू ने एक मादा बंदर को गंभीर अवस्था में प्रसव पीड़ा से तड़पते देखा। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मादा बंदर का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाया।अपर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरजीत सचान ने बताया कि गर्भस्थ शावक की प्रसव से पहले ही मृत्यु हो चुकी थी, जिससे मादा बंदर की स्थिति गंभीर हो गई थी। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार कर उसका प्रसव कराया। उन्होंने बताया कि यदि उपचार में कुछ और देर हो जाती तो मादा बंदर की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।उपचार के बाद मादा बंदर को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया। विभाग द्वारा उसकी निगरानी की जा रही है तथा आवश्यक उपचार की व्यवस्था भी की गई है।डिप्टी रेंजर सचिन पटेल के निर्देशन में वन कर्मी दुर्गेश यादव, तिलकराम, विपिन शुक्ला, रामलाल और बचन सहित अन्य कर्मचारियों ने रेस्क्यू अभियान में अहम भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की टीम के प्रयासों की सराहना की।































