पार्किंग स्थल से इतर राह चलते दो-चार पहिया वाहनों से वसूली पर जिम्मेदार चुप !
रिपोर्ट।राहुल त्रिपाठी (बाराबंकी)
बाराबंकी :- पार्किंग स्थल पर तो वाहन खड़ा करने पर टोकन देकर निर्धारित शुल्क की वसूली समझ में आती है। लेकिन राह चलते फुटपाथ पर गाड़ी रोकी नहीं कि पहुंच गए वसूली भाई टोकन लेकर कि गाड़ी भले ही ना खड़ी करो पर पैसा जरूर दो। यह हाल और कहीं नहीं बल्कि पूरी दुनिया को आपसी सौहार्द का अद्भुत संदेश ‘जो रब है वही राम’ का संदेश देने वाले हाजी वारिस अली शाह के अस्ताने की धरती देवॉ शरीफ पर धड़ल्ले से की जा रही है।
वैसे बता दें कि कोई एक सरकारी संरक्षण में कोई लूट खसोट नहीं है। बल्कि यहां तो तमाम विकास कार्यों में भी फर्जीवाड़ा का इतना बड़ा पुलंदा रहा है कि लोकायुक्त द्वारा जांच के लिए पूर्व में तीन-चार बाद अलग-अलग जांच कमेटी का गठन तक करना पड़ा लेकिन मजाल है कि कभी किसी दोषी को सजा मिली हो। यहां तो मीडिया तक को लूटने में कोई कसर यहां के तमाम तत्कालीन अधिशाषी अधिकारियों की शह पर इस तरह की गई कि तमाम अखबारों के जहां लाखों रुपए बकाया हैं वहीं मौजूदा ईओ तब के आरओ पर छपे विज्ञापनों तक का भुगतान करने से साफ इंकार करते हुए चतुर्थ स्तंभ तक का उत्पीड़न कर रहीं है। जिससे समझा जा सकता है कि आमजन की क्या सुनवाई यहां होती होगी। जिसमें एक पीड़ित ठेकेदार तो बीते 3-4 वर्षों से करीब 35-40 लाख रुपए के समान की आपूर्ति करने के बाद लगातार पेमैंट को लेकर धक्के खा रहा है और फंड रहने के बावजूद बेअंदाज ईओ का कहना है कि कर देंगे पेमैंट लेकिन कब यह नहीं बतातीं। जिससे समझा जा सकता है कि किसी कम पूंजी वाले नव व्यवसायी ठेकेदार के पास तो आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।
वैसे वाहन से पार्किंग शुल्क वसूली मुख्य मार्ग पर करने के विषय में जब चेयरमैन हारून वारसी से जब सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि पार्किंग के ठेके के विषय में उन्हें जानकारी नहीं है। हां यह जरूर बताया कि तमाम लोगों द्वारा अवैध वसूली की शिकायत उन्हें मिली है। वैसे मोटरसाइकिल की वसूली जहां करने युवक पहुंचा था उसकी पर्ची पर भी ठेकेदार का नाम व संपर्क नंबर तक अंकित नहीं दिखा। जिससे शक गहराया, दूसरी तरफ तमाम ठेले वहीं फुटपाथ पर अतिक्रमण किए दिखे जिन्होंने भी नाम ना उजागर करने की शर्त पर बताया कि ठेला लगाने के नाम पर उनसे भी खासी रकम रोज वसूली की जाती है।
बता दें कि तमाम सरकारी मानक केवल आमजन के लिए ही होकर रह गए हैं, जबकि अपने सुख सुविधाओं के नाम पर ऐसी (वातानुकूलित व्यवस्था) से लेकर यही अधिकारी अनाप शनाप ना सिर्फ खर्च कर डालते हैं, बल्कि जनहित के नाम की रकम भी डकार जा रहे हैं। इससे भी पेट नहीं भर रहा तो राह चलते लोगों से वसूली को संरक्षण देकर आमजन की जेब पर भी भ्रष्टाचारी खुली डकैती डील रहे हैं।