बाराबंकी में पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक गंभीर मामले में कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह कार्रवाई ऑपरेशन कनविक्शन के तहत प्रभावी पैरवी के चलते संभव हो सकी।
मामला वर्ष 2018 का है। थाना कोतवाली नगर क्षेत्र स्थित सैय्यद बाबा की मजार, रेलवे स्टेशन परिसर निवासी वादी ने अभियुक्त अहमद अली पुत्र दिलदार अली के खिलाफ जबरन अप्राकृतिक दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। इस संबंध में थाना जीआरपी बाराबंकी में मुकदमा संख्या 89/18 धारा 377 भादवि व 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।
तत्कालीन विवेचक प्रभारी निरीक्षक रवीन्द्र बहादुर सिंह ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मॉनिटरिंग सेल, पैरोकार व अभियोजन टीम ने कोर्ट में मजबूत पैरवी करते हुए महत्वपूर्ण गवाह पेश किए।
अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-45 बाराबंकी ने अभियुक्त अहमद अली को दोषी मानते हुए 10 वर्ष कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इस पूरे मामले में विशेष लोक अभियोजक लव त्रिपाठी, थानाध्यक्ष जीआरपी बाराबंकी चन्द्रमणि पाण्डेय एवं उनकी टीम की अहम भूमिका रही।