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शाहजहांपुर में ‘ठंडे पानी’ के नाम पर गर्म हुआ करोड़ों का खेल, पंचायत बजट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप !

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Naradsamvad - Narad news Agency
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शाहजहांपुर में ‘ठंडे पानी’ के नाम पर गर्म हुआ करोड़ों का खेल, पंचायत बजट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप !

रिपोर्ट:-  अनुराग मिश्रा 

शाहजहांपुर :- शाहजहांपुर में क्षेत्र पंचायतों और ग्राम पंचायतों में वाटर कूलर लगाए जाने के मामले में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि जून-जुलाई की भीषण गर्मी में जनसेवा के नाम पर करीब 1,000 वाटर कूलर लगाए गए, लेकिन कई स्थानों पर बिजली कनेक्शन, तकनीकी जांच और पेयजल गुणवत्ता परीक्षण जैसे जरूरी पहलुओं की अनदेखी की गई।

आरोपों के मुताबिक करीब 400 ग्राम पंचायतों और 600 क्षेत्र पंचायतों में वाटर कूलर लगाए गए। सवाल उठ रहा है कि बिना वैध बिजली कनेक्शन, लोड असेसमेंट और अर्थिंग सत्यापन के इन मशीनों का संचालन किस आधार पर किया गया।

इसके अलावा पानी की गुणवत्ता और TDS की जांच को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यदि पेयजल की गुणवत्ता की जांच नहीं हुई, तो आम जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी किसकी होगी?

लोकल सप्लायर और भुगतान को लेकर भी सवाल

वाटर कूलरों की खरीद में पारदर्शी प्रक्रिया, GeM अथवा ई-टेंडरिंग के पालन को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कई जगह घटिया गुणवत्ता के उपकरण लगाए गए, जिनकी कार्यक्षमता पर भी सवाल हैं।

सबसे गंभीर आरोप कथित कमीशनखोरी को लेकर हैं। सूत्रों के हवाले से 42 से 45 प्रतिशत तक ‘कट मनी’ की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

एक उदाहरण के तौर पर 3,14,818 रुपये के एक वाटर कूलर के भुगतान का उल्लेख किया गया है। इसमें 14,059 रुपये टैक्स काटने के बाद 3,00,759 रुपये का भुगतान बताया गया है। आरोप है कि इसी राशि में विभिन्न स्तरों पर कथित हिस्सेदारी तय की गई।

अब बड़ा सवाल यह है कि यदि बिजली कनेक्शन, तकनीकी परीक्षण और पानी की गुणवत्ता संबंधी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हुईं, तो भुगतान किस आधार पर किया गया?

मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी धन के उपयोग में वास्तविक रूप से कोई अनियमितता या वित्तीय नुकसान हुआ है या नहीं।

अगले अंक में: किस ब्लॉक में कितने वाटर कूलर लगे, किस दर पर भुगतान हुआ और किन फर्मों से खरीद की गई—इससे जुड़े दस्तावेजी तथ्यों की पड़ताल।

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