शाहजहांपुर में धान की बड़े पैमाने पर अवैध जमाखोरी के आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय राइस मिलें अपनी निर्धारित क्षमता से 80 प्रतिशत तक अधिक स्टॉक रख रही हैं।
आरोप है कि सरकारी खरीद केंद्र बंद होने के बाद मिल मालिकों और बिचौलियों ने किसानों से कम कीमत पर धान खरीदकर उनका शोषण किया है। मंडी सचिव के ऑनलाइन पोर्टल पर हर मिल के अधिकृत स्टॉक का विवरण है, लेकिन गोदामों में मौजूद वास्तविक मात्रा और इन आंकड़ों में बड़ा अंतर देखा गया है।
तिलहर में छापेमारी और जुर्माना
प्रशासनिक जांच तिलहर से शुरू हुई, जहां एसडीएम और आईएएस अधिकारी आदित्य श्रीवास्तव ने भगवती राइस मिल पर छापा मारा। स्टॉक के भौतिक सत्यापन के दौरान अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद मिल पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
हालांकि, इस शुरुआती कार्रवाई के बाद जिले की अन्य मिलों में निरीक्षण बंद हो गया है। इससे उद्योग को बचाने के लिए राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप की आशंका जताई जा रही है।
किसानों की बदहाली और कालाबाजारी
अनुराग मिश्रा की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान खरीद प्रणाली के कारण किसान कर्ज के बोझ और वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि राइस मिल सिंडिकेट जमाखोरी से लाभ कमा रहा है।
आम जनता और स्थानीय लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि प्रशासन ने अन्य मिलों तक जांच का विस्तार क्यों नहीं किया। उन्होंने स्थानीय किसानों की कीमत पर हो रही धान की कालाबाजारी को रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई की मांग की है।









