सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स में कुछ बदलाव करने के लिए ड्राफ्ट संशोधन पेश किए हैं। इन प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने की शर्तों को और अधिक सख्त बनाना है।
मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए सुरक्षित ड्राइविंग ट्यूटोरियल के अनिवार्य पासिंग मार्क्स को बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही प्रशासनिक अपडेट के लिए प्रोसेसिंग समय को कम कर इसे और तेज बनाने की योजना है।
इकोनॉमिक टाइम्स और मनीकंट्रोल की रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को 22 अक्टूबर, 2026 के आसपास प्रकाशित किया था। इस दस्तावेज के जरिए आम जनता से 30 दिनों की समय सीमा के भीतर आपत्तियां या सुझाव मांगे गए हैं। सरकार की ओर से अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही ये आधिकारिक नियम लागू होंगे।
ड्राइवर योग्यता के लिए नए मानक
वर्तमान नियमों के तहत आवेदकों को ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए सुरक्षित ड्राइविंग ट्यूटोरियल में 60 प्रतिशत अंक लाना जरूरी होता है। अब नए प्रस्ताव के तहत इस सीमा को बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की तैयारी है।
द ट्रिब्यून और टाइम्स ऑफ इंडिया की खबरों के मुताबिक, इस ट्यूटोरियल की अवधि कम से कम 30 मिनट की होनी चाहिए। इन कड़े कदमों का उद्देश्य भारतीय सड़कों पर नए ड्राइवरों के बीच सुरक्षा जागरूकता को बेहतर बनाना है।
डिजिटल सेवाओं में सुधार और फीस में छूट
अधिकारियों की योजना मौजूदा लाइसेंस धारकों के लिए डिजिटल सेवाओं को और अधिक सरल बनाने की है। ऐसे आवेदक जो आधार-प्रमाणित ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करेंगे या व्यक्तिगत विवरण में बदलाव का अनुरोध करेंगे, उन्हें विशेष फीस छूट का लाभ मिलेगा।
हिंदू बिजनेसलाइन की रिपोर्ट बताती है कि ये बदलाव नागरिकों के लिए नौकरशाही की बाधाओं को कम करने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा हैं। लाइसेंसिंग विभागों को नाम और पते के अपडेट को 15 दिनों की समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा।
यदि अधिकारी इस समय सीमा को पूरा करने में विफल रहते हैं, तो कुछ विशेष स्थितियों में सिस्टम आवेदन को स्वीकृत मान सकता है। यह पूरी व्यवस्था डिजिटल दक्षता पर निर्भर करती है ताकि व्यक्तिगत रिकॉर्ड बिना किसी देरी के अपडेट रहे।
कार्ड फॉर्मेट और जरूरी दस्तावेजों में बदलाव
मंत्रालय अब पुराने फॉर्मेट की जगह नए PVC या लेमिनेटेड कार्ड लाने का इरादा रखता है। इन लाइसेंस कार्ड्स के डिजाइन अलग-अलग होंगे ताकि भारतीय नागरिकों और विदेशी पासपोर्ट धारकों के बीच अंतर किया जा सके।
अधिकारियों को उम्मीद है कि कलर-कोडेड या अलग फॉर्मेट वाले ये कार्ड ट्रैफिक स्टॉप और दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के दौरान पहचान करने में मदद करेंगे। आवेदकों को अब स्वीकार्य पहचान दस्तावेजों की एक अपडेटेड लिस्ट का पालन करना होगा।
- ड्राफ्ट में LIC पॉलिसी को निवास या पहचान के स्वीकृत प्रमाणों की सूची से बाहर कर दिया गया है।
- जानकारी के सत्यापन के लिए आधार, वोटर आईडी कार्ड और वैध पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने इन उच्च मानकों का समर्थन किया है, हालांकि ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। नितिन गडकरी के नेतृत्व वाला मंत्रालय अब इन नियमों के अंतिम ढांचे को तय करने के लिए हितधारकों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है।
आने वाले अपडेट से यह साफ होगा कि इन बदलावों का पास रेट और राज्य लाइसेंसिंग अधिकारियों के दैनिक कार्यभार पर क्या प्रभाव पड़ता है।































