
जनशिकायतों के निस्तारण में शिथिलता पर डीएम सख्त, अब तक 24 अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
बाराबंकी, 19 अगस्त। समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) के तहत प्राप्त जनशिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में लापरवाही बरतने और समीक्षा बैठक से अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 12 अधिकारियों का एक दिवस का वेतन बाधित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों से तीन दिवस के भीतर सुस्पष्ट एवं तथ्यात्मक स्पष्टीकरण मांगा गया है।
शासन की प्राथमिकताओं में शामिल आईजीआरएस के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का निर्धारित समय सीमा में निस्तारण कर शिकायतकर्ता को संतुष्ट करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद समीक्षा के दौरान कई संदर्भ लंबित पाए गए। निर्धारित समीक्षा बैठक में संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति को भी जिलाधिकारी ने गंभीरता से लिया। इसी के बाद कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।
जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जद में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला समन्वयक कौशल विकास मिशन, खंड शिक्षा अधिकारी हैदरगढ़, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक त्रिवेदीगंज, खंड शिक्षा अधिकारी मसौली, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक दरियाबाद, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक सिरौली गौसपुर, अधिशासी अधिकारी रामनगर, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) बैंक, खंड शिक्षा अधिकारी देवा, अधिशासी अधिकारी बेलहरा और प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक बनीकोडर शामिल हैं।
आईजीआरएस मामलों में लापरवाही पर इससे पहले भी 12 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। 11 अगस्त को 59 डिफाल्टर संदर्भों के संबंध में संबंधित 12 अधिकारियों का एक दिवस का वेतन बाधित किया गया था। अब दोबारा 12 अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद आईजीआरएस प्रकरणों में कार्रवाई का आंकड़ा बढ़कर 24 हो गया है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनशिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आईजीआरएस संदर्भों में अनावश्यक विलंब, लापरवाही अथवा समीक्षा व्यवस्था के प्रति उदासीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में भी लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
























