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जब डॉक्टर बने आतंकवादी तौ दवाई को करिहै

रिपोर्ट/विवेक शुक्ला

रामनगर बाराबंकी। तहसील क्षेत्र के कस्बा रानीगंज में डॉ शर्मेश शर्मा ने अपने पिता स्व भगीरथ शर्मा की पुण्यस्मृति में मंगलवार को कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि बृजपाल सिंह ज्ञानू बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक सुनील सिंह, पं. विजय दत्त मिश्रा राकेश मिश्रा द्वारा मां भारती का माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया। मुख्य अतिथि ने कवियों आगंतुओं को अंगवस्त्र देकर व माल्यार्पण कर सम्मानित किया । कार्यक्रम के शुभारंभ में कवियत्री शशि श्रेया ने सरस्वती वंदना में ‘शारदे शारदे शारदे’ गीत प्रस्तुत किया ।कवि नागेंद्र सिंह की कविता मायने पिता के सब समझ में आए तब, अपनी औलाद जब गोद में उठाए थे सुन लोग भावुक हो गए ।लोकगीत कर जगन्नाथ दीक्षित निर्दोष की कविता ‘जब लड़का पहिरिहैं खादी तौ पढ़ाई को करिहै को लोगों ने खूब सराहा।लखनऊ से आए कवि लोकेश त्रिपाठी ने पढ़ा ‘मर गई माँ तो बट गए जेवर बट गया घर पिता के मरते ही । राष्ट्रीय कवयित्री शशि श्रेया की पंक्तियाँ ‘नफरतों ने तो यहां सरहदें उठाई हैं प्रेम ही आदमी को आदमी बनाता है’ सुन श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए । कवयित्री संध्या त्रिपाठी ने पढ़ा ‘मैं अधरों पर तेरे प्रियतम मधुर मुस्कान दे दूंगी’ सुन श्रोता वाह वाह करने लगे ।डॉ ओम शर्मा ओम की पंक्तियां ‘बूढ़े मां-बाप को भगा करके लोग कुत्तों को पाल लेते हैं’ श्रोता विचार मग्न हो गए ।सुफियान ने पढ़ा ‘अदब से आया हूं मैं अदब से जाऊंगा मोहब्बत से मैं अपनी चार मिसरो को सुनाऊंगा।’डॉ शर्मेश शर्माने पढ़ा ‘जवानों की जवानी की रवानी कौन लिखेगा दूध को दूध और पानी को पानी कौन लिखेगा।’डॉ रणधीर सिंह ने पढ़ा ‘नही छल छन्द से मतलब हमें ईमान प्यारा है हमें नवरात्रि प्यारी है हमें रमजान प्यार है पंक्तियों को लोगों ने खूब साराहा।’वसीम रामपुरी की पंक्तियां ‘जमाना कहता है प्यार जिसको वह लमहा मुझ पर गुजर गया है, वह चुपके चुपके न जाने कैसे नजर से दिल उतर गया है सुन सारा पांडाल तालियों से गूंज उठा।कार्यक्रम की अध्यक्षता जगन्नाथ दीक्षित निर्दोष व संचालन डॉ शर्मेश शर्मा ने किया।
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