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चौपाल परंपरा को पुनर्जीवित करने पर जोर, शान्तिपुरम सेवा समिति की सभा संपन्न !

 गुरु ज्ञान के बिना जीवन की सफलता संभव नहीं : सुरेश चन्द्र बैसवार !

रिपोर्ट:- राहुल त्रिपाठी

बाराबंकी :- शान्तिपुरम सेवा समिति, बाराबंकी की नियमित सभा अम्मा सदन, जीत नगर स्थित राजेश्वर पुरम कॉलोनी में आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन दिनेश सिंह द्वारा किया गया, जबकि अध्यक्षता सुरेश चन्द्र बैसवार ने की और संचालन प्राचार्य नन्हे सिंह ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ युवा कवि साहब नारायण शर्मा की वाणी वंदना और नींबू लाल गुप्ता के मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद आयोजक दिनेश सिंह ने उपस्थित पदाधिकारियों, सदस्यों, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार रत्नेश कुमार, ओज कवि दीपक दिवाकर, व्यंग्यकार अनिल श्रीवास्तव ‘लल्लू’ सहित अन्य अतिथियों का माल्यार्पण व शाल ओढ़ाकर सम्मान किया।

समिति के संयोजक डॉ. वीरेन्द्र श्रीवास्तव ने समिति के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से सकारात्मक विचारों का आदान-प्रदान और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना ही मुख्य उद्देश्य है।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रत्नेश कुमार ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के चलते गांवों की पारंपरिक चौपाल संस्कृति समाप्त होती जा रही है, जिसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चौपाल सामाजिक संवाद और आपसी सहयोग का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करती थी।

सभा में विभिन्न कवियों और साहित्यकारों ने काव्यपाठ कर माहौल को भावपूर्ण बना दिया। वहीं अदवेत ठाकुर ने संगीतमय प्रस्तुति दी और प्राचार्य नन्हे सिंह ने लोककथा सुनाई।

अध्यक्षीय उद्बोधन में सुरेश चन्द्र बैसवार ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ज्ञान के बिना जीवन में सफलता संभव नहीं है। गुरु ही व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करता है।

कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ. दिनेश सिंह ने सभी उपस्थित अतिथियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्यकार, समाजसेवी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे !

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