नशे के खिलाफ जागरूकता और एक शिक्षा-एक पाठ्यक्रम आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा : कौशल किशोर !
रिपोर्ट:- राहुल त्रिपाठी
बाराबंकी:- पारख महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर ने 13 सितम्बर को लखनऊ में आयोजित होने वाली आत्म सम्मान रैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं से सहभागिता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज के आत्मसम्मान, शिक्षा, युवा पीढ़ी के भविष्य और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष के मुद्दों को लेकर कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
वे सोमवार को एलआईसी के पीछे स्थित एक लॉज में पारख महासंघ की जिला इकाई के कार्यकर्ताओं के साथ आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने युवाओं में तेजी से बढ़ते नशे के प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा आज युवा पीढ़ी को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। उन्होंने कहा कि लोग उनसे अक्सर कहते हैं कि नशे की दुकानें बंद करा दीजिए, जबकि दुकानदार किसी को नशा खरीदने के लिए बुलाने नहीं जाता। यदि लोग स्वयं नशा खरीदना बंद कर दें तो ऐसी दुकानें स्वतः बंद हो जाएंगी।
कौशल किशोर ने कहा कि देश में ड्रग्स, मॉर्फीन और स्मैक की सामान्य रूप से कोई दुकान नहीं होती, इसके बावजूद इनका सेवन तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं में जागरूकता पैदा करने से नशे की समस्या पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि कक्षा पांच से ही बच्चों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान की जानकारी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर दी जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि लड़कियों के साथ छेड़छाड़ जैसे अपराधों की कानूनी सजा की जानकारी भी विद्यालय स्तर पर दी जानी चाहिए, ताकि बच्चों में कानून के प्रति जागरूकता और महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो।
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि देश के महापुरुषों के योगदान को पाठ्यक्रम में उचित स्थान देते हुए उन्हें इतिहास पुरुष के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए। समाज निर्माण में उनकी भूमिका को नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि देश में एक समय लगभग 94 हजार विद्यालयों को बंद करने का निर्णय लिया गया था, जिसका उन्होंने विरोध किया था। अब पुनः बंद हुए विद्यालयों को खोलने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने ‘एक शिक्षा, एक पाठ्यक्रम’ लागू करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए इसे आत्मसम्मान का विषय बताया।
कौशल किशोर ने पारख महासंघ के विचारों की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘पारख’ का अर्थ विवेक है और वास्तविक विवेक आत्मा से उत्पन्न होता है। संत कबीर साहेब ने इसी आत्मिक विवेक को जागृत करने का कार्य किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेवी रत्नेश कुमार ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। शिक्षा, नशामुक्ति, महिला सम्मान और सामाजिक चेतना जैसे मुद्दे पूरे समाज के भविष्य से जुड़े हुए हैं।
कार्यक्रम का संचालन पारख महासंघ के जिलाध्यक्ष सुशील कुमार रावत ने किया। बैठक में 13 सितम्बर को लखनऊ में प्रस्तावित आत्म सम्मान रैली में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाई गई।
इस अवसर पर हरख ब्लॉक प्रमुख रवि रावत, भाजपा नेता अरुण रावत, शिक्षक नेता आशुतोष पटेल, जिला उपाध्यक्ष दिनेशचंद पाठक, प्रदीप रावत, छोटेलाल रावत, कमलेश रावत, सीताकांत वर्मा, अमरीश रावत, हंसराज यादव, उमादेवी सहित करीब एक सैकड़ा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


























