एलन मस्क ने आरोप लगाया है कि भारत के ताकतवर उद्योगपति स्टारलिंक के भारतीय बाजार में प्रवेश को रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा उनकी अपनी मोनोपॉली यानी एकाधिकार को बनाए रखने के लिए किया जा रहा है।
मस्क ने इन कोशिशों को भारतीय लोगों के खिलाफ एक अपराध बताया है। यह बयान उन्होंने 7 अक्टूबर, 2026 को दिया।
यह विवाद उस समय सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में जियो के सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर एक बड़ी घोषणा करने की तैयारी कर रहे थे।
दिग्गज टेलीकॉम कंपनियों पर निशाना
एलन मस्क ने अपने बयान में किसी भी व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया। हालांकि, उनके शब्दों को रिलायंस जियो के मुकेश अंबानी और भारती एयरटेल के सुनील मित्तल जैसे टेलीकॉम दिग्गजों पर निशाना मानकर देखा जा रहा है।
इन तनातनी के बावजूद, स्टारलिंक के कामकाज की राह में कुछ अहम पड़ाव आए हैं। भारत के स्पेस रेगुलेटर IN-SPACe ने 10 जुलाई, 2025 को स्टारलिंक Gen1 को सैटेलाइट सेवाएं देने के लिए पांच साल का लाइसेंस दिया था।
भारत में बुनियादी ढांचा और सुरक्षा इंतजाम
स्टारलिंक की बिजनेस ऑपरेशंस की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रेयर ने IMC 2026 में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने पुष्टि की कि कंपनी ने भारत में अपना ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा कर लिया है।
इस बुनियादी ढांचे में 20 गेटवे साइट्स और सैकड़ों एंटीना शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी ने भारत के लिए खास सुरक्षा कंट्रोल विकसित किए हैं ताकि यूजर्स का डेटा देश के भीतर ही रहे।
स्टारलिंक ने कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर भी काम किया है, जिनमें शामिल हैं:
- रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर।
- महाराष्ट्र, गुजरात और मेघालय की सरकारों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट पर सहमति।
कीमतें और भारतीय इंटरनेट बाजार का हाल
दिसंबर 2025 में स्टारलिंक ने अपने रेजिडेंशियल प्लान की कीमतों की घोषणा की थी। इसके तहत मासिक शुल्क 8,600 रुपये तय किया गया है और हार्डवेयर किट की कीमत 34,000 रुपये रखी गई है।
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मार्च 2026 में कहा था कि भारत में इंटरनेट बहुत सस्ता है। उनके अनुसार, 1GB मोबाइल डेटा की कीमत 0.08 डॉलर से 0.10 डॉलर के बीच है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 1.09 अरब से ज्यादा हो गई है। इनमें से 1.04 अरब लोग वायरलेस कनेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
साल 2014 में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 250 मिलियन थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 1.03 अरब हो गई। हालांकि, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच टेली-डेंसिटी में अब भी काफी अंतर बना हुआ है।

























