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उत्तर प्रदेश में आशा और संगिनी कार्यकर्ताओं का हल्लाबोल, 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू किया विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के एटा समेत कई जिलों में आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को पूरा करने के लिए व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने जिला प्रशासन को औपचारिक ज्ञापन सौंपे हैं और चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे काम का पूर्ण बहिष्कार करेंगी।

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इन कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में यात्रा भत्ते में वृद्धि और जिले के अनुसार 18,000 रुपये से 26,000 रुपये तक का निश्चित मानदेय शामिल है। इसके साथ ही वे खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी कर रही हैं।

आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाओं की मांग

कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों में स्पष्ट किया है कि मृत्यु की स्थिति में 20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए। साथ ही, मृत कार्यकर्ता के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।

इसके अलावा, उन्होंने अपनी सूची में निम्नलिखित अन्य महत्वपूर्ण बिंदु भी रखे हैं:

  • हर साल मानदेय में 20% की वृद्धि की जाए।
  • सभी कार्यकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य बीमा की सुविधा हो।
  • मातृत्व अवकाश (maternity leave) का प्रावधान किया जाए।
  • मोबाइल रिचार्ज के खर्चों की प्रतिपूर्ति की जाए।

विभिन्न जिलों में प्रदर्शन और तालाबंदी

एटा जिले में कार्यकर्ताओं ने सकित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने मुख्य गेट को लॉक कर दिया। इससे पहले 3 अक्टूबर 2026 को तहसील परिसर में भी एक प्रदर्शन आयोजित किया गया था।

7 अक्टूबर 2026 को प्रदेश के अन्य हिस्सों जैसे बांदा, पचपेड़वा, शेरगढ़ (बरेली), मणियार और गोंडा में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए। शेरगढ़ के दामोदर पार्क में संगिनियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिसमें वे प्रति विज़िट भत्ते को 300 रुपये से बढ़ाकर 700 रुपये करने की मांग कर रही हैं। गोंडा में कार्यकर्ताओं ने मानदेय संरचना को मानकीकृत करने के लिए मुख्यमंत्री से औपचारिक अनुरोध किया है।

सरकारी आश्वासनों पर जताया आक्रोश

यूनियन प्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने फरवरी 2026 में आश्वासन दिया था। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई गई थी, लेकिन पिछले समझौतों को लागू करने के लिए अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

राज्य स्तर पर बढ़ते असंतोष के बीच आशा कार्यकर्ताओं ने 8 अक्टूबर को लखनऊ के इको गार्डन में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया है। इसके बाद 23 अक्टूबर को एक और विशाल प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।

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