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Naradsamvad

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फर्जी गैंगरेप से नाम हटाने के लिए दरोगा ने मांगे 50 लाख 🥺 पीड़ित ने परेशान होकर एंटी करप्शन को शिकायत फिर दरोगा उठा लिया 

 लखनऊ पुलिस की साख पर फिर बट्टा!

पेपरमिल चौकी के इंचार्ज दारोगा धनंजय सिंह को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथों ₹2 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया ! 

पीड़ित प्रतीक गुप्ता को फर्जी गैंगरेप केस में फंसाया गया था। दारोगा ने केस से नाम हटाने के लिए पहले 50 लाख रुपये मांगे, फिर 2 लाख में डील फाइनल हुई !

एक पूर्व कर्मचारी ने डेढ़ साल पुराने मामले में झूठा आरोप लगाया और निर्दोष व्यक्ति को फंसाया गया।

मामला क्या था? कारोबारी प्रतीक गुप्ता के खिलाफ उनकी एक पूर्व महिला कर्मचारी ने हजरतगंज थाने में गैंगरेप (सामूहिक दुष्कर्म) का एक मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़ित का दावा था कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है।

इस मामले की विवेचना (जांच) चौकी इंचार्ज धनंजय सिंह कर रहे थे। उन्होंने मुकदमे से नाम हटाने और क्लीन चिट देने के बदले में शुरुआत में 50 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी थी। बाद में सौदा तय होते-होते पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये देना तय हुआ।

कारोबारी प्रतीक गुप्ता भ्रष्टाचार के आगे झुके नहीं और उन्होंने इसकी शिकायत एंटी करप्शन (भ्रष्टाचार निवारण संगठन) की लखनऊ टीम से कर दी। टीम ने जाल बिछाया

योजना के मुताबिक, जैसे ही कारोबारी प्रतीक गुप्ता ने चौकी इंचार्ज धनंजय सिंह को उनके दफ्तर (चौकी) में रासायनिक पाउडर लगे 2 लाख रुपये कैश दिए, वैसे ही पहले से घात लगाकर बैठी एंटी करप्शन की टीम ने दारोगा को रंगे हाथों दबोच लिया।

गिरफ्तारी के बाद जब दारोगा धनंजय सिंह के हाथ धुलवाए गए, तो केमिकल के कारण पानी का रंग गुलाबी हो गया, जो रिश्वत लेने का सबसे बड़ा कानूनी सबूत है।

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