बरेली के पशुपालन विभाग के अपर निदेशक (ग्रेड-2, प्रशासन) कार्यालय में निजता के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिनेश कुमार वर्मा ने इस मामले को लेकर पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव को एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
दिनेश कुमार वर्मा ने अपनी शिकायत के साथ एक शपथ पत्र भी जमा किया है। उन्होंने मांग की है कि कार्यालय परिसर के भीतर लगाए गए CCTV कैमरों की निष्पक्ष जांच की जाए।
कैमरों की खरीद और वित्तीय अनियमितताएं
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉ. मदन पाल सिंह के कार्यकाल के दौरान कार्यालय में तीन CCTV कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों की खरीदारी के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल का इस्तेमाल नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता ने इन उपकरणों से जुड़ी खरीद प्रक्रिया, सप्लाई ऑर्डर, प्रशासनिक मंजूरी, बजट और भुगतान के रिकॉर्ड की पूरी जांच करने की मांग की है।
महिला कर्मचारियों की निजता का उल्लंघन
शिकायत में कैमरों की लोकेशन को लेकर गहरी चिंता जताई गई है। एक कैमरा उस गैलरी में लगाया गया है जहां महिला कर्मचारी अपना आधिकारिक काम करती हैं, जिससे वे लगातार निगरानी के कारण मानसिक तनाव और शर्मिंदगी महसूस कर रही हैं।
दूसरा कैमरा महिला शौचालय की ओर जाने वाले रास्ते पर लगाया गया है। इससे कर्मचारियों के बीच यह डर पैदा हो गया है कि उनकी निजी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जा रही है। इसके अलावा, आरोप है कि अपर निदेशक (ग्रेड-2) ने इन कैमरों की लाइव फीड को अपने निजी मोबाइल फोन से जोड़ रखा है, जिससे स्टाफ की अनधिकृत निगरानी की जा रही है।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला और कार्रवाई की मांग
शाहजहांपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह निगरानी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2017 में के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले का भी जिक्र किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस शिकायत का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना और महिला कर्मचारियों के सम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने निम्नलिखित मांगों पर जोर दिया है:
- कैमरों और लॉगिन क्रेडेंशियल्स का तकनीकी ऑडिट किया जाए।
- निजता का उल्लंघन करने वाले कैमरों की दिशा बदली जाए।
- वित्तीय या प्रशासनिक कदाचार के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
इस शिकायत की प्रतियां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, पशुपालन मंत्री, लखनऊ स्थित राज्य महिला आयोग और बरेली मंडल के कमिश्नर को भी भेजी गई हैं।































