उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में वोटर लिस्ट में हेरफेर के गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में दो उप-जिलाधिकारियों (SDMs) हेमंत चौधरी और मयंक गोस्वामी के साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।
यह पूरा मामला वोटर लिस्ट में बदलाव के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-8 के गलत इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोप है कि इस फॉर्म के जरिए मतदाताओं के विवरण में अनुचित तरीके से बदलाव किए गए थे।
फॉर्म-8 के आवेदनों की जांच और गड़बड़ियां
जिलाधिकारी आलोक कुमार ने इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट दी है। उन्होंने बताया कि कुल 13,779 आवेदन फॉर्म-8 के माध्यम से जमा किए गए थे। इन आवेदनों में से 10,470 को मंजूरी दी गई, जबकि 3,309 आवेदनों को खारिज कर दिया गया था।
शुरुआती जांच में कुछ खास तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि भीखारीपुर की रहने वाली सजदा बी के नाम में बदलाव किया गया था। इसके अलावा, जैबुननिसा का नाम मतदाता सूची से पूरी तरह हटा दिया गया था।
विपक्षी दलों के आरोप और शिकायतें
वोटर लिस्ट की शुचिता को लेकर विपक्षी दलों ने गहरी चिंता जताई है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि वोटर लिस्ट की 16,504 प्रविष्टियों में गड़बड़ी की गई है। वहीं समाजवादी पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
इन दोनों राजनीतिक दलों ने इस पूरे घटनाक्रम में मंत्री संजय सिंह गंगवार की भूमिका और संलिप्तता पर भी सवाल उठाए हैं। वे इस बात की जांच चाहते हैं कि इस प्रक्रिया में किसका प्रभाव था।
सभी विधानसभा क्षेत्रों की समीक्षा
जिलाधिकारी आलोक कुमार ने पुष्टि की है कि अब पूरी प्रक्रिया की गहन जांच की जा रही है। सभी विधानसभा क्षेत्रों की वोटर लिस्ट का व्यापक रिव्यू किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की त्रुटि को पकड़ा जा सके।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उन गलतियों को सुधारना है जिनके कारण प्रभावित मतदाताओं के अधिकारों पर असर पड़ा हो। सभी निर्वाचन क्षेत्रों की सूचियों की जांच कर उनमें सुधार करने का काम जारी है।































