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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल से अंधेरे में डूबे लाखों घर, जनजीवन अस्त-व्यस्त

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल के कारण सामान्य जनजीवन और प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया है। इस विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन भी करीब 40,000 बिजली कर्मचारी काम से दूर रहे, जिससे पूरे राज्य में बिजली संकट गहरा गया है।

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यह हड़ताल 22 अक्टूबर, 2026 को शुरू हुई थी और इसके 24 अक्टूबर, 2026 को समाप्त होने की उम्मीद है। इस पूरे आंदोलन का आयोजन हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स जॉइंट स्ट्रगल फ्रंट द्वारा किया गया है।

निजीकरण के फैसले से उपजा विवाद

इस विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) का 19 अक्टूबर, 2026 को लिया गया एक फैसला है। इस फैसले के तहत इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 14 और 15 के अंतर्गत गुरुग्राम और नूह में बिजली वितरण के लिए Eleven Power Private Limited को 25 साल का पैरेलल लाइसेंस दिया गया है।

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HERC का कहना है कि इस लाइसेंस का मकसद बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और उपभोक्ताओं के पास विकल्प बढ़ाना है। दूसरी तरफ, यूनियन के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह हड़ताल सरकार द्वारा किए गए अधूरे वादों के खिलाफ एक प्रतिक्रिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण के इस कदम को रद्द करने सहित उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह विरोध प्रदर्शन अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जाएगा।

लाखों घरों की बिजली गुल और औद्योगिक नुकसान

बिजली कर्मचारियों की इस हड़ताल की वजह से राज्य के 23 जिलों में भारी बिजली कटौती हो रही है। अनुमान है कि करीब 8 से 10 लाख घर इस समय अंधेरे में हैं। इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, रेवाड़ी, हिसार और अंबाला जैसे बड़े केंद्र शामिल हैं।

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बिजली न होने के कारण औद्योगिक उत्पादन पूरी तरह रुक गया है और पानी की सप्लाई भी बाधित हो गई है। इस स्थिति से नाराज जनता ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और रास्तों को जाम कर दिया। अंबाला में SDM ऑफिस और बार एसोसिएशन के वीडियो फुटेज से सार्वजनिक सेवाओं पर पड़े इस बुरे असर को साफ देखा जा सकता है। सुरक्षा के मद्देनजर बिजली सबस्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस बल तैनात किया गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया और समाधान की कोशिश

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 21 अक्टूबर, 2026 को घोषणा की थी कि सरकार HERC के इस फैसले को इलेक्ट्रिकल अपीलेट ट्रिब्यूनल (APTEL) के सामने चुनौती देने की योजना बना रही है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने इस हड़ताल को अनावश्यक करार दिया है।

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मंत्री अनिल विज ने बताया कि सरकार इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 108 के तहत HERC के फैसले को रद्द करने के विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है और यूनियन नेताओं के साथ 23 अक्टूबर, 2026 को दोपहर 3 बजे एक बैठक तय की है। मंत्री विज ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकल जाएगा।

इसी बीच, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के मैनेजिंग डायरेक्टर लगातार राज्य नेतृत्व को अपडेट दे रहे हैं। वह हर घंटे प्रभावित फीडरों और सबस्टेशनों की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट भेज रहे हैं।

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