उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहाँ एक हिस्ट्रीशीटर संतोष सिंह को पकड़ने में पुलिस पूरी तरह नाकाम रही, जिसका एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
यह घटना बुधवार रात करीब 8:00 बजे की है। यह जिला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वित्त मंत्री का गृह जिला भी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए छह मिनट के वीडियो में पुलिस अधिकारियों की बेबसी साफ नजर आ रही है।
मामला तब शुरू हुआ जब पुलिस को सूचना मिली कि रोसर कोठी के बंगलो नंबर आठ पर स्थित एक दुकान में नशीले पदार्थों की बिक्री की जा रही है। इस जानकारी के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी।
हिस्ट्रीशीटर के सामने बेबस नजर आए पुलिसकर्मी
शुरुआत में मौके पर दो पुलिस कॉन्स्टेबल पहुंचे थे। वहां उनकी मुलाकात हिस्ट्रीशीटर संतोष सिंह से हुई, जिसने पुलिसकर्मियों को पकड़ने के बजाय उनका वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
जब कॉन्स्टबलों ने अपनी परेशानी बताई और मदद के लिए कॉल किया, तो जल्द ही तीन सब-इंस्पेक्टर और छह अतिरिक्त कॉन्स्टेबल वहां पहुंच गए। कुल नौ पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, फिर भी वे संतोष सिंह को हिरासत में नहीं ले पाए।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी करीब आधे घंटे तक संतोष सिंह को समझाते रहे। कुछ पुलिसकर्मी तो उसे थाने चलने के लिए विनती करते हुए भी नजर आ रहे हैं, लेकिन वह उनकी बात नहीं मान रहा था।
अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद आरोपी फरार
हैरानी की बात यह रही कि आधा दर्जन से ज्यादा कानून प्रवर्तन कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद हिस्ट्रीशीटर संतोष सिंह वहां से भागने में सफल रहा। पुलिस उसे रोकने में पूरी तरह विफल रही।
इस घटना ने स्थानीय पुलिस बल की प्रभावशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में शाहजहांपुर के डीएम, बरेली के रेंज डीआईजी रोहित यादव और लखनऊ स्थित प्रशासनिक कार्यालयों का जिक्र भी किया गया है।
विपक्ष के नेताओं, जिनमें अखिलेश यादव का संदर्भ शामिल है, ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। आलोचकों ने सवाल उठाया है कि क्या पुलिस जिले के प्रभावशाली या आपराधिक तत्वों पर अपना नियंत्रण खो चुकी है।































