उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक तेंदुए के हमले में 7 साल की बच्ची की जान चली गई है। इस दर्दनाक हादसे में बच्ची की पहचान सान्या के रूप में हुई है। यह घटना सोमवार शाम को घटित हुई।
बच्ची का क्षत-विक्षत शरीर मंगलवार की सुबह एक गन्ने के खेत से बरामद किया गया। यह पूरा मामला धौरहरा रेंज के बोजिया गांव का है, जो दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आता है।
घर के आंगन से बच्ची को खींच ले गया तेंदुआ
जानकारी के मुताबिक, 12 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7 बजे सान्या अपने घर के आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान एक तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया और उसे अपने जबड़ों में दबाकर पास के गन्ने के खेत में खींच ले गया।
बच्ची के पिता संपत गिरि और गांव के अन्य लोग तेंदुए के पीछे भागे। लेकिन अंधेरा होने और गन्ने की फसल घनी होने की वजह से वे सान्या को नहीं ढूंढ पाए।
खोज अभियान और शव की बरामदगी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्ची की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन अंधेरे के कारण रात में खोज जारी नहीं रखी जा सकी।
13 अक्टूबर 2026 की सुबह जब दोबारा तलाश की गई, तो सान्या का बुरी तरह क्षत-विक्षत शरीर घर से लगभग 500 मीटर दूर गन्ने के खेत में मिला। मृत्यु के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
वन विभाग की कार्रवाई और ग्रामीणों का आक्रोश
धौरहरा के फॉरेस्ट रेंजर अशोक कुमार श्रीवास्तव ने तेंदुए के हमले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इलाके में गश्त और सर्च ऑपरेशन को अब और तेज किया जाएगा। साथ ही ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
दूसरी तरफ, स्थानीय लोगों ने वन विभाग के प्रति गहरा गुस्सा जताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की प्रतिक्रिया में देरी हुई और ऐसी घटनाओं को रोकने में वे पूरी तरह नाकाम रहे हैं।
इलाके में तेंदुए का आतंक और अन्य घटनाएं
लखीमपुर खीरी में तेंदुए के हमलों की यह पहली घटना नहीं है। पिछले छह महीनों में 17 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय निवासियों के बीच डर बना हुआ है।
इसी दिन एक और दुखद खबर सामने आई, जहां बहराइच जिले में भी तेंदुए के हमले से एक बच्चे की मौत की रिपोर्ट मिली है।































