उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में प्रशासन ने सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। 4 अक्टूबर 2026 को प्रशासन ने जिले के नगवा और जमुआ गांवों में अवैध ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू की।
यह पूरी कार्रवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 30 सितंबर 2026 को दिए गए एक आदेश के बाद की गई है। कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया था कि वह सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाए और इसकी अनुपालन रिपोर्ट 5 अक्टूबर 2026 तक जमा करें।
पुराने विवाद और कानूनी प्रक्रिया
इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत साल 2017 में हुई थी। नगवा के पूर्व ग्राम प्रधान पराग दत्त मिश्रा ने एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में खलिहान और खाद गड्ढों के लिए निर्धारित जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत की गई थी।
तराबगंज की एसडीएम सविता शुक्ला के मुताबिक, इस अभियान के तहत कुल 26 अवैध निर्माणों की पहचान की गई थी। इनमें से आठ मामले फिलहाल कोर्ट में लंबित हैं, जबकि अन्य 18 कब्जाधारकों को जमीन खाली करने के लिए औपचारिक नोटिस दिए गए थे।
प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा इंतजाम
प्रशासन की सख्ती को देखते हुए कई परिवारों ने बुलडोजर आने से पहले ही अपने घर और दुकानें खुद तोड़ना शुरू कर दिया था। रविवार तक कुल 18 कब्जाधारकों ने अपने निर्माण हटा लिए थे। बाकी बचे अवैध निर्माणों को हटाने के लिए प्रशासन ने बुलडोजर का इस्तेमाल किया।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन ने पांच अलग-अलग थानों से 300 से अधिक पुलिसकर्मियों की टुकड़ी तैनात की थी। सुरक्षा के साथ-साथ वहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और मेडिकल एम्बुलेंस भी मौजूद रखी गई थीं।
अधिकारियों की निगरानी में चला अभियान
सरकारी जमीन को वापस पाने की इस मुहिम की निगरानी उच्च अधिकारियों द्वारा की गई। इस ऑपरेशन का पर्यवेक्षण मुख्य राजस्व अधिकारी रिंकी जायसवाल, एसडीएम सविता शुक्ला और न्यायिक एसडीएम अशोक गुप्ता ने किया।
- अभियान का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना था।
- कुल 26 अवैध ढांचों को हटाने की योजना थी।
- 18 लोगों ने स्वयं निर्माण हटाए, बाकी के लिए बुलडोजर चलाए गए।
- 5 अक्टूबर की समय सीमा तक रिपोर्ट सौंपनी थी।

























