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वोटर लिस्ट संशोधन रद्द करने वालों को नितेश राणे ने बताया देशद्रोही, बांग्लादेश-पाकिस्तान का दिया हवाला

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को रद्द करने का समर्थन करने वाले लोगों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने ऐसे लोगों को देशद्रोही ताकतें करार दिया है।

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नितेश राणे का यह बयान मुंबई में 4 अक्टूबर 2026 को आयोजित ‘गर्जना मोर्चा’ के बाद आया है। इस प्रदर्शन में MNS प्रमुख राज ठाकरे और शिव सेना (UBT) नेता उद्धव ठाकरे ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध जताया था।

राणे ने तर्क दिया कि SIR प्रक्रिया को खत्म करने की मांग से मतदाता सूची की शुद्धता और अखंडता से समझौता होगा। उन्होंने दावा किया कि यदि इन संशोधनों को रद्द किया गया, तो ऐसी स्थिति पैदा होगी जहाँ बांग्लादेश या पाकिस्तान में रहने वाले लोग मुंबई में वोट डाल सकेंगे।

वोटर लिस्ट की पारदर्शिता और सुरक्षा पर दावा

नितेश राणे के अनुसार, मतदाता सूची को सटीक और पारदर्शी बनाए रखने के लिए SIR प्रक्रिया बहुत जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया का विरोध करना देशद्रोही तत्वों को चुनावी डेटाबेस में घुसपैठ करने की अनुमति देने के समान है।

ठाकरे चचेरे भाइयों के नेतृत्व वाले इस विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस और NCP (शरदचंद्र पवार) गुटों का भी समर्थन मिला था। यह विरोध मुख्य रूप से वर्तमान संशोधन चक्र के दौरान ड्राफ्ट चुनावी रोल से 2.06 करोड़ से अधिक नामों को हटाने के खिलाफ था।

नाम हटाने की प्रक्रिया और राजनीतिक विवाद

यह संशोधन चक्र 30 जून 2026 से शुरू होकर 4 नवंबर 2026 तक चलेगा। हटाए गए नामों की संख्या पिछले मतदाताओं का लगभग 21.14% है। प्रदर्शनकारियों ने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए और मतपत्रों (ballot papers) को दोबारा शुरू करने की मांग की।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नामों को हटाने के पीछे मृत्यु, प्रवास या पता न मिल पाना जैसे कारण रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक अभी भी अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन और सत्यापन

चुनाव आयोग ने इस मामले में 26 सितंबर 2026 को अपनी प्रतिक्रिया दी थी। आयोग ने मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कुछ निर्देश जारी किए थे।

  • चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को निर्देश दिया कि वे भौतिक सुनवाई के बजाय घर-घर जाकर सत्यापन करें।
  • इस कदम का उद्देश्य चुनावी सूची के अपडेट की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाना है।

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