उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के उत्तरी इलाकों में 3 और 4 अक्टूबर 2026 को हुई भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस मूसलाधार बारिश की वजह से गोमती नदी का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है, जिससे पूरे इलाके में गंभीर बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है।
इस प्राकृतिक आपदा के कारण शहर के 40,000 से ज्यादा घर पानी में डूब गए हैं। हालात इतने खराब हैं कि लगभग 10,000 निवासियों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।
निचले इलाकों में पानी का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया है। फैजुलगंज, दाऊदनगर, मामा कॉलोनी, बसहरी, बहराउरा, अटकिया, निक्रोजपुर, हयात नगर मोड, दौलतखेड़ा और सैथा जैसे क्षेत्रों में चार से पांच फीट तक पानी भर गया है। इन इलाकों में आवाजाही के लिए अब केवल नावों का ही सहारा लिया जा रहा है।
प्रशासन की कार्रवाई और बचाव अभियान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को ‘ग्राउंड जीरो’ पर रहने को कहा है ताकि प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता दी जा सके और फसलों के नुकसान का सही आकलन किया जा सके।
जिला मजिस्ट्रेट Vishakh G. और संयुक्त पुलिस आयुक्त Babloo Kumar ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है। प्रशासन ने 10 नावों के बेड़े के जरिए गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित बाहर निकालने का काम शुरू किया है।
बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए नगर आयुक्त Gaurav Kumar ने जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में एंटी-लार्वा स्प्रे, फॉगिंग और मोबाइल टॉयलेट्स की व्यवस्था करने का आदेश दिया है। बचाव कार्य में NDRF और SDRF की टीमें भी शामिल हैं।
नुकसान का विवरण और राजनीतिक प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री Swatantra Dev Singh ने बताया कि इस क्षेत्र में महज 15 दिनों के भीतर साल भर की 25% बारिश हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति साल 2008 के बाद पहली बार देखी गई है।
इस बाढ़ ने खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। कुल 3,500 खेतों की फसलें पूरी तरह डूब गई हैं, जबकि कुछ गांवों में 1,000 बीघा तक की फसल बर्बाद होने की रिपोर्ट मिली है।
राहत कार्यों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता Akhilesh Yadav ने संकट से निपटने में राज्य सरकार के रवैये की आलोचना की है।
राहत कार्य और बुनियादी ढांचे की स्थिति
स्थानीय विधायक Dr. Neeraj Bora और MLC Mukesh Sharma ने नावों के जरिए प्रभावित इलाकों का दौरा किया और राहत सामग्री वितरित की। हालांकि, स्थानीय लोग ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली और मदद मिलने में हो रही देरी को लेकर जनप्रतिनिधियों और मीडिया के प्रति अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट की वजह से गोमती नगर एक्सटेंशन और CG सिटी के करीब 500,000 निवासी सुरक्षित रहे। लेकिन सुरक्षा कारणों से रिवर फ्रंट और फूड वैली को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।
- 40,000 से अधिक घर जलमग्न हुए।
- 10,000 लोग विस्थापित होकर सुरक्षित स्थानों पर गए।
- 3,500 खेतों की फसलें पानी में डूबीं।
- 10 नावों के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।

























