राजस्थान यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों के नतीजे रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को घोषित कर दिए गए। इन परिणामों में अभिषेक चौधरी ने एक बड़ी जीत हासिल की है।
अभिषेक चौधरी को कुल 6.15 मिलियन वोट मिले। उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी अनिल चोपड़ा को इस मुकाबले में हरा दिया है। अनिल चोपड़ा जयपुर रूरल से लोकसभा के पूर्व उम्मीदवार रहे हैं और उन्हें 5.45 मिलियन वोट मिले।
इन दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतिम अंतर 69,419 वोट रहा। इस चुनावी दौड़ में राजकुमार परसवाल तीसरे स्थान पर रहे, जिन्हें 1.95 मिलियन वोट प्राप्त हुए।
चुनाव प्रक्रिया और नियुक्ति के नियम
इस पूरी चुनावी प्रक्रिया का आयोजन 21 अप्रैल से 20 मई 2026 के बीच किया गया था। हालांकि अभिषेक चौधरी वोट गिनती में आगे रहे हैं, लेकिन उनकी औपचारिक नियुक्ति भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक प्रोटोकॉल के अधीन है।
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब और राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा दिल्ली में शीर्ष तीन उम्मीदवारों के इंटरव्यू लेंगे। इन इंटरव्यू में अभिषेक चौधरी, अनिल चोपड़ा और राजकुमार परसवाल शामिल होंगे।
नई कार्यकारिणी समिति की अंतिम घोषणा से पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी इस मूल्यांकन प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। चुनी जाने वाली यह नई कार्यकारिणी समिति तीन साल के कार्यकाल के लिए काम करेगी।
जीत के बाद की गतिविधियां और प्राथमिकताएं
नतीजों की घोषणा के बाद अभिषेक चौधरी ने अपनी माता से आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की और उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया।
गोविंद सिंह डोटासरा ने अभिषेक चौधरी के प्रदर्शन के लिए उन्हें आधिकारिक तौर पर बधाई दी। अपनी जीत के बाद दिए गए बयान में चौधरी ने युवाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया और अपने मुख्य लक्ष्यों के बारे में बताया। अभिषेक चौधरी ने नशीले पदार्थों के सेवन और जुए के खिलाफ अभियान चलाने के साथ-साथ संविधान की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया है।
चुनाव के दौरान विवाद और कानूनी स्थिति
यह चुनाव कई विवादों के बीच संपन्न हुआ। चुनाव के दौरान अनिल चोपड़ा ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने विरोध प्रदर्शन किया था।
अनिल चोपड़ा ने पोस्टल बैलेट रद्द किए जाने के खिलाफ प्रदर्शन किया था और वोटों की दोबारा गिनती की मांग की थी। इस विवाद के कारण मामला कानूनी कार्यवाही तक पहुंच गया था, जिसके बाद चुनाव संपन्न हुए।

























