उत्तर प्रदेश के बरेली मंडल में धान की खरीद प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आ गई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में कर्मचारियों की तैनाती को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
पीलीभीत जिले की बिसालपुर मंडी में मार्केटिंग इंस्पेक्टर Shyam Bahadur Dubey को खरीद केंद्र प्रभारी नियुक्त किया गया है। आलोचकों का दावा है कि यह नियुक्ति राज्य सरकार की धान खरीद नीति का सीधा उल्लंघन है।
Shyam Bahadur Dubey पिछले नौ साल से अधिक समय से इसी जिले में तैनात रहे हैं। इसमें आठ साल बिसालपुर मंडी और एक साल Puranpur Mandi में उनकी सेवा शामिल है।
तैनाती नियमों और सरकारी नीति की अनदेखी
पिछले साल Shyam Bahadur Dubey का तबादला लखनऊ कर दिया गया था। हालांकि, वर्तमान धान खरीद सीजन के दौरान उन्हें वापस बरेली मंडल से संबद्ध कर दिया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, RMO बरेली Rajesh उपाध्याय ने कार्यकाल के नियमों को नजरअंदाज करते हुए Dubey को दोबारा बिसालपुर लोकेशन पर नियुक्त किया।
इस नियुक्ति को सरकारी खरीद नीति के क्लॉज 7.6 का सीधा उल्लंघन बताया जा रहा है। इस नियम के तहत कुछ महत्वपूर्ण शर्तें लागू होती हैं:
- कोई भी मार्केटिंग इंस्पेक्टर जो पिछले वर्ष किसी विशिष्ट मंडी या खरीद केंद्र पर तैनात था, वह अगले वित्तीय वर्ष में वहां नहीं रह सकता।
- अगले सत्र में उसी स्थान पर दोबारा तैनाती करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
भ्रष्टाचार के आरोप और जांच की मांग
इस मामले में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि खरीद सीजन के दौरान नियमों को ताक पर रखकर ‘लुभावनी’ पोस्टिंग दी जाती है।
आरोप है कि ऐसी खास पोस्टिंग पाने के लिए बड़े आर्थिक लेन-देन किए जाते हैं ताकि नियमों को आसानी से बायपास किया जा सके।
संवेदनशील मंडियों में एक ही अधिकारी की बार-बार नियुक्ति ने अब विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है।
इस घटना ने प्रशासन की पारदर्शिता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब मुख्यमंत्री कार्यालय, उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya, उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak और बरेली के DM की निगरानी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।































