Skip to main content

Naradsamvad

[post-views]

बाराबंकी के मझाउनी गांव में यूकेलिप्टस पेड़ों की कटाई पर विवाद, राजस्व टीम ने जमीन की पैमाइश कर स्पष्ट की स्थिति

बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र के मझाउनी गांव में यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई को लेकर चल रहा जमीन विवाद अब सुलझ गया है। स्थानीय राजस्व टीम द्वारा की गई जांच के बाद इस पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो गई है। क्षेत्रीय लेखपाल Aditya Verma और राजस्व निरीक्षक Jaishankar Upadhyay ने मौके पर जाकर जमीन का सर्वे और पैमाइश की ताकि विवाद से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।

Ad image

इस विवाद की शुरुआत 7 अक्टूबर को हुई थी। उस दिन Balakram नाम के एक किसान अपनी जमीन पर लगे यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई कर रहे थे। इसी दौरान Anita और Sheela नाम की दो महिलाओं ने वहां पहुंचकर काम रुकवा दिया। इन दोनों शिकायतकर्ताओं ने उन पेड़ों पर अपना मालिकाना हक जताते हुए दावा किया था कि पेड़ उनके हैं।

शुरुआत में यह मामला स्थानीय पुलिस चौकी तक पहुंचा, जिसके बाद यह पुलिस स्टेशन गया और अंत में राजस्व विभाग के पास पहुंचा। बुधवार को राजस्व निरीक्षक Jaishankar Upadhyay ने मौके पर जमीन की पैमाइश की और मामले की पूरी जांच की।

पैमाइश में सामने आई जमीन की असलियत

राजस्व टीम की जांच और पैमाइश के बाद यह पुष्टि हुई कि जिस प्लॉट नंबर पर पेड़ काटे जा रहे थे, वह Balakram की ही जमीन है। पैमाइश के दौरान यह भी साफ हुआ कि Anita और Sheela जिस जमीन पर अपना दावा कर रही थीं, वह वास्तव में ग्राम समाज की जमीन है।

जांच में यह पाया गया कि शिकायतकर्ता Anita और Sheela का उस विवादित स्थल से कोई कानूनी संबंध नहीं था। राजस्व अधिकारियों द्वारा की गई इस निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई की सराहना की गई है।

ALSO READ  श्रीरामचरित मानस पाठ के अवसर पर 21वाँ निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा शिविर संपन्न

भ्रामक दावों और नुकसान पर विचार

इस मामले के बाद यह बात सामने आई है कि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाने के लिए जमीन विवादों को केवल आधिकारिक रिकॉर्ड और भौतिक सर्वेक्षण के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए। बिना किसी ठोस आधार के लगाए गए आरोपों से बचना जरूरी है।

विशेषज्ञों ने यह सुझाव दिया है कि यदि जानबूझकर गलत दावा करने या दुर्भावनापूर्ण इरादे के सबूत मिलते हैं, तो सक्षम अधिकारियों को नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।

  • पेड़ों की कटाई रुकने से किसान को हुए संभावित वित्तीय नुकसान की जांच की मांग की गई है।
  • सिविल शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता और तथ्यों की सटीकता की जरूरत बताई गई है।
  • असली जमीन मालिकों के अधिकारों की रक्षा करना और शिकायत प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकना जरूरी है।

अन्य खबरे

गोल्ड एंड सिल्वर

Our Visitors

1593055
Total Visitors
error: Content is protected !!