मेरठ की एक जिला अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। इस पूरे घटनाक्रम को ‘ब्लू ड्रम मर्डर केस’ के नाम से जाना जाता है। यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 की रात को मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में हुई थी।
अपराधियों ने न केवल सौरभ राजपूत की हत्या की, बल्कि सबूत मिटाने के लिए उसके शरीर के टुकड़े कर दिए। उन्होंने शरीर के अंगों को एक नीले रंग के ड्रम में छिपाया और उसे सीमेंट से सील कर दिया। इस वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर चले गए थे।
अदालती कार्यवाही और गवाहों के बयान
इस मामले में जिला और सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने 30 सितंबर को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। केस की अंतिम बहस 17 सितंबर को पूरी हुई थी। अभियोजन पक्ष ने परिस्थितियों के सबूतों और 22 गवाहों की गवाही के आधार पर मृत्युदंड की मांग की थी।
पीड़ित परिवार की पैरवी कर रहे वकील विजय बहादुर ने बताया कि गवाहों में सौरभ राजपूत के भाई बबलू, उनकी मां और उनके दोस्त शामिल थे। इसके अलावा उन दुकानदारों ने भी गवाही दी, जिन्होंने आरोपियों को वह नीला ड्रम, दवाइयां, चाकू, सीमेंट और रेत बेची थी, जिनका इस्तेमाल इस अपराध में किया गया था।
जेल में कैदियों की स्थिति और पारिवारिक संबंध
मेरठ जेल के अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के अनुसार, जेल में आने के बाद दोनों दोषियों को नशों की लत से छुटकारा दिलाने के लिए तीन से चार महीने के रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) की जरूरत थी। जेल के दौरान साहिल शुक्ला से उसकी दादी और भाई मिलने आए थे, लेकिन मुस्कान रस्तोगी से मिलने उसका कोई भी परिवार का सदस्य नहीं आया।
मुस्कान रस्तोगी ने पिछले नवंबर में जेल के अंदर ही एक बेटी को जन्म दिया। तब से वह धार्मिक हो गई है और उसने अपनी बच्ची को देखने की इच्छा जताई है।
वारदात से पहले की घटनाक्रम
सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से वापस मेरठ आया था। उसके वापस आने के बाद 25 फरवरी को मुस्कान ने अपने घर पर जन्मदिन मनाया था। इसके बाद 28 फरवरी को उनकी बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया गया।
इन खुशियों के ठीक बाद 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत को नशीली दवाएं दी गईं और फिर उसकी हत्या कर दी गई। इस जघन्य अपराध के बाद मेरठ की सड़कों और सोशल मीडिया पर लोगों के बीच भारी आक्रोश देखा गया था।

























