मेरठ की जिला अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को मस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। इन दोनों ने मिलकर मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या कर दी थी।
जिला और सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने यह फैसला सुनाया। यह मामला काफी चर्चा में रहा क्योंकि इसमें पीड़ित के शरीर के कटे हुए हिस्से सीमेंट से भरे एक नीले ड्रम से बरामद हुए थे।
यह पूरी घटना मार्च 2025 की है। उस समय सौरभ राजपूत लंदन से छुट्टी लेकर अपने घर वापस आए थे, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।
हत्या की साजिश और कानूनी कार्यवाही
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने पहले पीड़ित को नशीला पदार्थ दिया। इसके बाद दोनों ने मिलकर सौरभ राजपूत को चाकू घोंपकर मौत के घाट उतार दिया।
इस मामले की जांच के बाद 1,000 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी। कोर्ट में कुल 126 सुनवाई हुई और 34 गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई।
इससे पहले 30 सितंबर 2026 को अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी पाया था। इसी आधार पर अब उन्हें फांसी की सजा दी गई है।
जुर्माना और अदालत की टिप्पणी
अदालत ने मौत की सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लगाया है। भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
इसके अलावा, सबूतों को नष्ट करने के लिए धारा 238(A) के तहत 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस पूरी सुनवाई के दौरान आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूद थे।
फैसला सुनाते समय न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अपराध की गंभीरता के हिसाब से अपराधी को सजा देना ही ‘धर्म’ है।
परिजनों की प्रतिक्रिया और कोर्ट का माहौल
सजा सुनाए जाने के बाद मस्कान रस्तोगी रोने लगी। उसने अदालत से अपनी दो बेटियों की देखभाल और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने की विनती की।
दूसरी ओर, मस्कान के माता-पिता ने एक लिखित बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी बेटी को मिलने वाली मौत की सजा का विरोध नहीं करेंगे।
सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी ने इस फैसले पर राहत महसूस की। उन्होंने बताया कि पिछले 18 महीनों से उनका परिवार इसी नतीजे के लिए प्रार्थना कर रहा था।
अदालत में मौजूद स्थानीय वकीलों ने भी इस फैसले का स्वागत किया और इसे न्याय की जीत बताया।

























