Skip to main content

Naradsamvad

रामनगर श्रीराम कथा: अतुल कृष्ण भारद्वाज ने बताया भरत और केवट के त्याग और समर्पण का महत्व

Naradsamvad
Naradsamvad - Narad news Agency
2 Min Read

नगर पंचायत रामनगर, बाराबंकी के पुराने तहसील परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के आठवें दिन कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भरत और केवट के प्रसंगों पर प्रवचन दिया। भारद्वाज ने जोर देकर कहा कि भरत और केवट का जीवन त्याग, समर्पण और भक्ति के गहरे उदाहरण हैं।

Ad image

उन्होंने बताया कि वनवास के दौरान भगवान राम ने भरत के साथ धन का बंटवारा नहीं किया, बल्कि विपत्तियों के बोझ को साझा किया। भारद्वाज ने गंगा तट पर भगवान राम, निषादराज गुह और केवट की मुलाकात का वर्णन किया और बताया कि कैसे केवट ने नदी पार कराने में मदद करने से पहले प्रभु के चरण धोकर स्वयं को धन्य महसूस किया।

ALSO READ  बाराबंकी सड़क हादसे में जान गंवाने वाले चार युवकों के परिजनों से मिले पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप

रामराज्य की भावना और गुणों की श्रेष्ठता

राम और भरत के पुनर्मिलन का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि भगवान राम ने भरत को ‘रघुकुल के हंस’ और ‘प्रेम का सागर’ बताया। चित्रकूट से लौटने के बाद, भरत ने भगवान राम की लकड़ी की खड़ाऊ (पादुका) को सिंहासन पर रखा, जिससे प्रभु की अनुपस्थिति में प्रतीकात्मक रूप से ‘रामराज्य’ की भावना स्थापित हुई।

ALSO READ  अमेठी में पुलिस मुठभेड़: 32 मामलों का वांछित अपराधी वकील उर्फ सेनापति गिरफ्तार, पैर में लगी गोली

भारद्वाज ने दावा किया कि सच्ची श्रेष्ठता पदों या परिस्थितियों के बजाय गुणों से आती है। उन्होंने इसके उदाहरण के रूप में निम्नलिखित नाम दिए:

  • देश के प्रति समर्पित ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
  • दुनिया भर में वेदांत का प्रचार करने वाले स्वामी विवेकानंद
ALSO READ  ACC राइजिंग स्टार्स एशिया कप के लिए तिलक वर्मा बने इंडिया ए टीम के कप्तान

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिन्हें भारद्वाज ने भरत के त्याग और केवट की भक्ति के मूल्यों को अपने जीवन में उतारने के लिए प्रोत्साहित किया।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Search
अपना ज़िला चुनें
error: Content is protected !!