बागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान कृष्ण के बारे में अपनी टिप्पणियों पर हुए भारी जन आक्रोश के बाद औपचारिक माफी मांगी है। यह विवाद 29 अक्टूबर, 2026 को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित एक ‘राम कथा’ कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ था।
इस कार्यक्रम में शास्त्री ने भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना की थी। उन्होंने भगवान राम को मुद्रा और स्वभाव में ‘सीधा’ बताया, जबकि भगवान कृष्ण की पारंपरिक ‘त्रिभंग’ मुद्रा को ‘टेढ़ा’ कहा और देवता द्वारा बांसुरी बजाने के आध्यात्मिक महत्व पर सवाल उठाए।
राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रिया
इन टिप्पणियों के कारण मथुरा और ब्रज क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक नेताओं और संतों ने उनकी कड़ी आलोचना की। 2 नवंबर, 2026 को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस मामले में हिस्सा लिया।
- अखिलेश यादव ने इन बयानों को ‘सनातन’ समाज की एकता को कमजोर करने की कोशिश करार दिया।
- उन्होंने खुद को ‘सनातनी’ बताने वाले और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोगों की चुप्पी पर सवाल उठाए।
- उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दंडात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
बढ़ते विरोध और भक्तों की भावनाओं को देखते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्पष्टीकरण और माफी जारी की। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियां अपमान के बजाय ‘भक्ति परंपरा’ और ‘प्रेम अभिव्यक्ति’ के रूप में थीं और जनता ने उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला। शास्त्री ने खुद को भगवान कृष्ण का भक्त बताया और कहा कि उनका इरादा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। 3 नवंबर, 2026 तक, विवाद को सुलझाने के लिए यह माफी प्राथमिक घटनाक्रम है।









