समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के इस्तेमाल के खिलाफ अपनी पार्टी के कड़े रुख को दोहराया है। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी सभी 80 संसदीय सीटें जीत भी लेती है, तब भी वह इस तकनीक का विरोध करना जारी रखेगी।
वाराणसी में बोलते हुए यादव ने जोर दिया कि यह स्टैंड चुनाव परिणामों के बारे में नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सिद्धांतों का मामला है। पारंपरिक बैलेट पेपर वोटिंग पर लौटने की उनकी पुरानी मांग रही है, जिसे उन्होंने संसद और विभिन्न प्रेस कार्यक्रमों में उठाया है। सबसे हालिया बार उन्होंने सितंबर 2026 में अपनी चिंताएं जाहिर की थीं।
वोट चोरी और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप
EVM का यह विरोध व्यापक INDIA गठबंधन द्वारा भी किया जा रहा है, जिसने भारत में चुनावी निष्ठा की जांच तेज कर दी है। 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की एक रैली के दौरान अखिलेश यादव ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को उजागर किया।
उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में चुनावी सूचियों में हेरफेर पर चिंता जताई। यादव का दावा है कि हालिया पंजीकरण प्रक्रियाओं के दौरान 1.27 लाख मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वाराणसी में बदलती जनभावना का जिक्र करते हुए वर्तमान प्रशासन के प्रति बढ़ते असंतोष की बात कही।
विपक्षी नेता EVM को हटाने के लिए अक्सर अमेरिका और जर्मनी जैसे अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हैं। हालांकि, भारतीय चुनाव आयोग (ECI) इन सभी आरोपों को खारिज करता रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि मशीनें सुरक्षित और भरोसेमंद हैं और वह चुनावी सूचियों के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) के संबंध में संस्थागत पूर्वाग्रह या व्यवस्थित हेरफेर के दावों को नकारता है।









