भारत के औद्योगिक क्षेत्र में सितंबर 2026 के दौरान भारी उछाल देखा गया है। इस महीने इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज की ग्रोथ 7.9 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। यह तेजी वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए औद्योगिक मजबूती का एक स्पष्ट संकेत देती है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 21 अक्टूबर को यह प्रोविजनल डेटा जारी किया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2023 के बेस ईयर वाली नई सीरीज में यह अब तक की सबसे तेज ग्रोथ है। यह प्रदर्शन अगस्त में दर्ज की गई 5.9 प्रतिशत की संशोधित ग्रोथ और सितंबर 2025 की 3.1 प्रतिशत ग्रोथ से काफी बेहतर है।
इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज कुल नौ महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों की निगरानी करता है। ये सभी सेक्टर मिलकर व्यापक इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के कुल वजन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं। इन उद्योगों से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के लिए जरूरी ऊर्जा, कच्चा माल और कंस्ट्रक्शन इनपुट की सप्लाई होती है।
इन आंकड़ों का मुख्य स्रोत डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के तहत आने वाला ऑफिस ऑफ द इकोनॉमिक एडवाइजर है।
अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों का प्रदर्शन
औद्योगिक परिदृश्य में यह विस्तार सभी क्षेत्रों में एक समान नहीं रहा। आंकड़ों के अनुसार, जहां छह सेक्टरों में ग्रोथ दर्ज की गई, वहीं तीन सेक्टरों में गिरावट देखी गई। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों में ग्रोथ रेट इस प्रकार रहे:
- आयरन ओर में सबसे ज्यादा 18.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
- बिजली उत्पादन में 11.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
- कोयला उत्पादन 10.7 प्रतिशत तक बढ़ा।
- रिफाइनरी उत्पादों में 10.3 प्रतिशत का विस्तार हुआ।
- सीमेंट उत्पादन में 9.8 प्रतिशत की ग्रोथ रही।
- स्टील उत्पादन में 4.9 प्रतिशत का लाभ मिला।
- फर्टिलाइजर्स में 11.7 प्रतिशत की गिरावट आई।
- नेचुरल गैस उत्पादन 4.6 प्रतिशत कम हुआ।
- कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के उत्पादन में 1.4 प्रतिशत की कमी आई।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कोयला उत्पादन में अगस्त की 3.8 प्रतिशत की गिरावट के बाद एक बड़ी वापसी हुई है। इस रिकवरी में लो बेस और पावर प्लांट्स को होने वाली अधिक सप्लाई ने मदद की है। वहीं, रिफाइनरी उत्पादों की ग्रोथ नई सीरीज की शुरुआत के बाद से अपने सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गई है।
इन सेक्टरों का वजन काफी ज्यादा है, जिसमें बिजली का वेटेज 30.9 प्रतिशत है। इसके बाद रिफाइनरी उत्पादों का वेटेज 22.6 प्रतिशत और स्टील का 17.6 प्रतिशत है।
आर्थिक प्रभाव और विशेषज्ञों का विश्लेषण
अप्रैल से सितंबर की अवधि के लिए संचयी ग्रोथ अब 5.1 प्रतिशत हो गई है। पिछले साल इसी अवधि के दौरान यह ग्रोथ केवल 2.5 प्रतिशत थी। Icra और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी फर्मों के विशेषज्ञों ने लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और ऊर्जा की बनी रहने वाली मांग को इस गतिविधि का मुख्य कारण बताया है।
इन विशेषज्ञों का विश्लेषण मिंट, बिजनेस स्टैंडर्ड, द इकोनॉमिक टाइम्स और द हिंदू जैसे मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट में शामिल किया गया है। हालांकि, सभी सेक्टर इस बढ़त का हिस्सा नहीं हैं। फर्टिलाइजर उत्पादक लगातार हो रही गिरावट से जूझ रहे हैं, जो नीति निर्माताओं के लिए एक संरचनात्मक चिंता बनी हुई है।
घरेलू कच्चे तेल और नेचुरल गैस उत्पादकों को भी वैश्विक ऊर्जा बदलावों के बीच उत्पादन स्तर बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ा है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अब आने वाले डेटा को करीब से देखेंगे ताकि महंगाई की दिशा और मैन्युफैक्चरिंग की सेहत का अंदाजा लगाया जा सके।
जैसे-जैसे अधिक व्यापक डेटा आएगा, इन प्रोविजनल आंकड़ों में और संशोधन किए जा सकते हैं। सरकार भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा नीतियों और औद्योगिक प्रोत्साहन कार्यक्रमों को तैयार करने के लिए इन सबूतों का उपयोग करेगी।

























