केंद्र सरकार Airports Authority of India (AAI) के 11 एयरपोर्ट्स के संचालन और उनके विकास की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी कर रही है। इन हवाई अड्डों को Public-Private Partnership (PPP) मॉडल के तहत निजी क्षेत्र के हवाले किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन एयरपोर्ट्स के लिए बिडिंग की प्रक्रिया दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है। इस योजना के जरिए हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
लीज़ की अवधि और एयरपोर्ट्स का ग्रुपिंग
प्रस्तावित योजना के तहत, इन 11 एयरपोर्ट्स को पांच अलग-अलग ग्रुप्स में बांटा जाएगा। इन हवाई अड्डों को लगभग 50 साल की लंबी अवधि के लिए लीज पर दिया जाएगा।
वाराणसी एयरपोर्ट को भी इस सूची में शामिल किया गया है। वर्तमान प्रस्ताव के मुताबिक, वाराणसी एयरपोर्ट को गया और कुशीनगर के एयरपोर्ट्स के साथ एक ही ग्रुप में रखा गया है।
बिडिंग प्रक्रिया और निवेश की संभावनाएं
इस बिडिंग प्रक्रिया में Adani Group और GMR जैसी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से निवेश बढ़ेगा और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास तेजी से होगा।
हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि वाराणसी एयरपोर्ट को किसी खास कंपनी को सौंपने के संबंध में अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
सार्वजनिक संपत्तियों और पारदर्शिता पर चर्चा
इस लंबी अवधि के लीज समझौते को लेकर सार्वजनिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। लोग इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और मार्केट कॉम्पिटिशन यानी बाजार की प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इसके साथ ही, सरकारी संपत्तियों के भविष्य के स्टेटस को लेकर भी बहस छिड़ गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस मॉडल के जरिए इन्वेस्टमेंट को बढ़ाना और हवाई अड्डों की सुविधाओं को आधुनिक बनाना है।

























