गोरखपुर में बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहाँ दुर्गा मूर्ति विसर्जन के लिए जा रहे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में 11,000 वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली लाइन आ गई। इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए।
यह घटना गुलरिहा थाना क्षेत्र के जंगल अयोध्या प्रसाद इलाके में राजही चौराहे के पास हुई। हादसा शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे के बीच हुआ जब विसर्जन के लिए जा रही ट्रॉली बिजली की तारों के संपर्क में आई।
बताया जा रहा है कि ट्रॉली की रेलिंग या उसमें लगी एक लंबी लोहे की छड़ ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन बिजली की लाइनों से टकरा गई। इस वजह से करंट फैल गया और वहां मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए।
हादसे में जान गंवाने वालों और घायलों की जानकारी
इस भीषण हादसे में तीन युवकों की मौत हो गई है। मृतकों की पहचान 17 साल के लकी, 18 साल के विक्की और उनके 21 साल के चचेरे भाई चंदन के रूप में हुई है। लकी और विक्की दोनों आपस में भाई थे।
मौत के अलावा इस घटना में 10 से 12 लोग घायल हुए हैं। घायलों में चार महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए BRD मेडिकल कॉलेज भेजा गया। इस दुर्घटना के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल को भी हल्का बिजली का झटका लगा था।
बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप और विरोध
हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन सड़क को कुछ समय के लिए जाम कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
परिजनों का दावा है कि दिन में बिजली बंद की गई थी, लेकिन शाम 4:30 बजे बिना किसी सूचना के बिजली सप्लाई चालू कर दी गई। विसर्जन में शामिल लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि लाइन में करंट वापस आ गया है।
प्रशासन की कार्रवाई और सुरक्षा इंतजाम
घटना की जानकारी मिलते ही जिला मजिस्ट्रेट दीपक मीणा और एसएसपी डॉ. कौस्तुभ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और उन्हें शांत कराया, जिसके बाद सड़क से जाम हटाया गया।
प्रशासन ने इस घटना के बाद सख्त कदम उठाए हैं। एक जूनियर इंजीनियर (JE) और विसर्जन जुलूस के साथ तैनात दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही संबंधित लाइनमैन की सेवा समाप्त कर दी गई है।
इस साल गोरखपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में कुल 4,460 दुर्गा मूर्तियां स्थापित की गई थीं। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए कई इंतजाम किए थे, जिनमें शामिल थे:
- मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह द्वारा समन्वय।
- DIG एस. चन्नाप्पा की निगरानी।
- नगर आयुक्त अजय जैन की देखरेख।
- एसपी सिटी निमिष पाटिल द्वारा सुरक्षा व्यवस्था।
इतने बड़े स्तर पर सुरक्षा तैयारियों के बावजूद, यह घटना बिजली प्रबंधन में हुई बड़ी चूक को दर्शाती है।

























