भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज, 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में तत्काल 100 प्रतिशत ड्यूटी फ्री एक्सेस मिल गया है। इसका मतलब है कि अब भारतीय सामानों पर वहां कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा।
भारत के लिए यह 17वां चालू मुक्त व्यापार समझौता है। यह पहली बार हुआ है जब नई दिल्ली ने शुरुआत से ही सभी टैरिफ लाइनों पर पूर्ण जीरो ड्यूटी एक्सेस हासिल किया है। इस समझौते को लेकर बातचीत मार्च 2025 में दोबारा शुरू की गई थी।
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते की बातचीत नौ महीने के भीतर पूरी कर ली गई थी। इस ऐतिहासिक समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुए थे। इस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री Todd McClay शामिल हुए थे।
इस समझौते को लागू करने के लिए न्यूजीलैंड की संसद ने सितंबर 2026 में जरूरी कानून पारित किया था। इसी कानूनी प्रक्रिया के बाद आज से इस समझौते को पूरी तरह लागू कर दिया गया है।
व्यापारिक प्रभाव और आर्थिक लक्ष्य
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025-2026 के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.15 बिलियन डॉलर रहा। पिछले साल की तुलना में इसमें 11 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। वर्तमान में भारत का न्यूजीलैंड के साथ 22.59 मिलियन डॉलर का छोटा व्यापार घाटा है।
यह समझौता इस गिरावट को रोकने और व्यापार घाटे को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। इसके तहत उन पीक टैरिफ को खत्म किया जाएगा जो पहले टेक्सटाइल, कपड़ों, चमड़े और रत्नों जैसे उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक पहुंच जाते थे।
इस बदलाव से फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों को तत्काल शुल्क राहत मिलेगी। वहीं दूसरी ओर, न्यूजीलैंड को भारत की 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों तक प्राथमिकता वाला एक्सेस मिलेगा।
भारत ने अपने कुछ संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों को बचाने के लिए लगभग 30 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को इस दायरे से बाहर रखा है। इनमें दालें, चीनी, डेयरी उत्पाद और प्याज शामिल हैं। आधिकारिक एग्रीमेंट फैक्टशीट के मुताबिक, न्यूजीलैंड से आने वाले कुछ सामानों जैसे सेब, कीवीफ्रूट और मनुका हनी के लिए विशेष कोटा व्यवस्था लागू होगी।
न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में 20 बिलियन डॉलर के निवेश की सुविधा देने का वादा किया है। यह निवेश मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के क्षेत्रों में किया जाएगा। दोनों देशों का लक्ष्य है कि 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंच जाए।
रोजगार, शिक्षा और पेशेवर अवसर
इस समझौते के जरिए कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए नए रास्ते खुलेंगे। एक अस्थायी रोजगार एंट्री वीजा पाथवे के तहत किसी भी समय 5,000 भारतीय पेशेवर वहां काम कर सकेंगे, जिसकी वैधता तीन साल होगी।
इसके अलावा, एक अलग वर्किंग हॉलिडे स्कीम भी शुरू की गई है। इसके तहत 18 से 30 वर्ष की आयु के 1,000 भारतीय हर साल अधिकतम 12 महीने तक न्यूजीलैंड में रह सकेंगे।
छात्रों के लिए भी इसमें विशेष प्रावधान किए गए हैं। अब छात्र प्रति सप्ताह 20 घंटे तक काम करने का अधिकार पाएंगे। साथ ही, STEM स्नातकों के लिए तीन साल के पोस्ट स्टडी वर्क वीजा की सुविधा होगी।
व्यापार सुगमता और नियम
व्यापार को आसान बनाने के लिए कार्गो रिलीज के समय को तय किया गया है। अब स्टैंडर्ड कार्गो को 48 घंटों के भीतर और जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं (पेरिशेबल्स) को 24 घंटों के भीतर रिलीज किया जाएगा।
कॉमर्स सेक्रेटरी Rajesh Agrawal ने कहा कि इस समझौते की शुरुआत विजयादशमी के दिन होना जीत और नई शुरुआत का प्रतीक है। फार्मा कंपनियों को इस बात से बड़ा फायदा होगा कि अब यूएस एफडीए (US FDA) और ईएमए (EMA) जैसे रेगुलेटर्स की निरीक्षण रिपोर्ट को आपसी मान्यता दी जाएगी।
व्यवसाय मालिक अब इन विशेष शर्तों के तहत शिपिंग शुरू कर सकते हैं, बशर्ते उनके उत्पाद तय किए गए ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ को पूरा करते हों। दोनों सरकारें कंपनियों की मदद के लिए आउटरीच इवेंट्स आयोजित करने की योजना बना रही हैं।
आने वाली तिमाहियों में द्विपक्षीय तंत्र के जरिए निवेश सुविधा और व्यापार प्रवाह की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। बिजनेस स्टैंडर्ड, मिंट, द इकोनॉमिक टाइम्स और द फाइनेंशियल एक्सप्रेस जैसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार्यान्वयन के बाद चीन को छोड़कर रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप के लगभग सभी सदस्यों के साथ भारत का व्यापार समझौता पूरा हो गया है।

























