बाराबंकी के Arya Hospital में इलाज के दौरान सतेंद्र सिंह नाम के एक 44 वर्षीय व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। सतेंद्र सिंह को एक टोल प्लाजा के पास हुए हादसे में पैर में फ्रैक्चर होने के बाद इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
परिजनों के मुताबिक, जब सतेंद्र सिंह को अस्पताल में भर्ती किया गया था, तब वह पूरी तरह होश में थे और उनकी हालत अच्छी थी। उन्हें कोई ऐसी गंभीर समस्या नहीं थी जिससे जान को खतरा हो। पैर के फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए उनके ऑपरेशन की तैयारी की गई थी।
ऑपरेशन में देरी और इंजेक्शन का मामला
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने सूजन का हवाला देते हुए ऑपरेशन को टाल दिया। डॉक्टरों ने पहले ऑपरेशन की तारीख 14 तारीख तय की थी, लेकिन बाद में परिवार से 18 तारीख को वापस आने के लिए कहा गया।
परिवार ने बताया कि जब सतेंद्र सिंह ICU में थे, तब उन्हें एक इंजेक्शन लगाया गया। इंजेक्शन लगने के करीब 10 मिनट बाद डॉक्टर वहां पहुंचे और परिजनों को बताया कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत लखनऊ के किसी अस्पताल में ले जाने की सलाह दी।
लखनऊ रेफर होने के बाद मौत और परिजनों का हंगामा
परिजने उन्हें तुरंत लखनऊ के Lohia Hospital ले गए, लेकिन वहां पहुंचने पर सतेंद्र सिंह को मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना से दुखी परिवार में गहरा रोष व्याप्त है और वे न्याय की मांग कर रहे हैं।
पोस्टमार्टम हाउस पर परिजनों ने सवाल उठाया कि एक स्वस्थ व्यक्ति, जिसका केवल पैर का रूटीन ऑपरेशन होना था, इलाज के दौरान कैसे मौत का शिकार हो गया। इस मामले में स्थानीय इंस्पेक्टर ने आश्वासन दिया है कि पुलिस की तरफ से FIR दर्ज की जाएगी।
जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
मौत की असल वजह अभी साफ नहीं हो पाई है और इसकी पुष्टि के लिए कुछ प्रक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अब निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्रवाई कर रहे हैं:
- मृतक के शरीर का पोस्टमार्टम कराना।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत का कारण तय करना।
- अस्पताल की कार्यप्रणाली की औपचारिक जांच करना।
फिलहाल मौत का आधिकारिक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और औपचारिक जांच के परिणामों के आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

























