भारतीय शेयर बाजार में 19 अक्टूबर 2026 को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस दिन सेंसेक्स 876.37 अंकों की भारी गिरावट के साथ 73,852.90 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में आई इस गिरावट के कारण सेंसेक्स में कुल 1.17 प्रतिशत की कमी आई है।
बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह बैंकिंग सेक्टर के निराशाजनक नतीजे और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं। इन कारणों ने निवेशकों के बीच घबराहट पैदा कर दी, जिससे बाजार का माहौल बिगड़ गया।
इस सत्र के दौरान निवेशकों की संपत्ति में बहुत बड़ी कमी आई है। अनुमान के मुताबिक, कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में 3.6 लाख करोड़ रुपये से लेकर 5 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है।
बैंकिंग और आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
निजी क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में जमकर बिकवाली देखी गई। दूसरी तिमाही के प्रदर्शन अपडेट आने के बाद निवेशकों ने इन शेयरों को बेचना शुरू कर दिया। निजी बैंकों के सेक्टर इंडेक्स में लगभग 1.85 प्रतिशत की गिरावट आई।
Axis Bank के शेयरों में 4 से 5 प्रतिशत तक की कमी आई, क्योंकि बैंक ने सालाना आधार पर ग्रोथ दिखाने के बावजूद मुनाफे के लक्ष्य को हासिल नहीं किया। इसी तरह HDFC Bank के शेयरों में भी 2 से 2.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सिर्फ बैंकिंग ही नहीं, बल्कि आईटी शेयरों में भी काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। आईटी सेक्टर के शेयर दिन के अंत तक करीब 1.3 प्रतिशत नीचे गिरकर बंद हुए।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक दबाव
घरेलू बाजार के साथ-साथ बाहरी आर्थिक दबाव भी निवेशकों पर हावी रहा। Strait of Hormuz के पास चल रहे तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 107 से 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं, इसलिए बाजार में आगे भी उथल-पुथल बनी रह सकती है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि हाल की तेजी के बाद यह गिरावट एक स्वस्थ सुधार हो सकता है, हालांकि यह गिरावट कितनी गहरी होगी, इस पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।
दशहरे की छुट्टी और निफ्टी की स्थिति
20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बंद रहे। इस छुट्टी की वजह से ट्रेडर्स को पिछले सत्र के नकारात्मक आंकड़ों पर विचार करने और स्थिति को समझने का अतिरिक्त समय मिल गया।
इस गिरावट का असर निफ्टी पर भी साफ नजर आया। निफ्टी 257.20 अंक या 1.11 प्रतिशत गिरकर 22,888.95 के स्तर पर बंद हुआ।
बाजार खुलने के बाद की रणनीति और नजरिया
जब 21 अक्टूबर को बाजार दोबारा खुलेगा, तो सबकी नजरें दूसरी तिमाही की बची हुई कंपनियों की अर्निंग रिपोर्ट्स पर होंगी। मार्केट एक्सपर्ट्स मुख्य रूप से इन दो बातों पर नजर रख रहे हैं:
- भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच कच्चे तेल की कीमतों का रुख क्या रहता है।
- अगर महंगाई के आंकड़े स्थिर नहीं हुए, तो Reserve Bank of India की क्या प्रतिक्रिया होगी।
सोमवार को जहां निजी बैंकों और आईटी निवेशकों को नुकसान हुआ, वहीं PSU बैंकों का सेगमेंट पूरे सत्र के दौरान अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा।
शॉर्ट-सेलर्स और बेहतर एंट्री पॉइंट का इंतजार करने वाले लोग इस गिरावट को एक मौके के तौर पर देख सकते हैं। हालांकि, पूरा बाजार अभी भी कंपनियों की सेहत और व्यापक आर्थिक बदलावों के प्रति काफी संवेदनशील बना हुआ है।

























