अमेठी के कटरी गांव में आयोजित पांच दिवसीय सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव कटरी महोत्सव में दुर्गा पूजा की धूम है। इस महोत्सव में इस साल एक बहुत ही भव्य पंडाल बनाया गया है, जिसे राजस्थान के हवा महल की वास्तुकला के अंदाज में तैयार किया गया है।
इस इलाके में एक दर्जन से अधिक विस्तृत पंडाल लगाए गए हैं। इन सभी पंडालों में देवी भगवती की मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
कटरी महोत्सव की परंपरा और विस्तार
कटरी गांव में बड़े पैमाने पर आयोजन करने की यह परंपरा साल 1985 से चली आ रही है। समय के साथ इस उत्सव का दायरा काफी बढ़ा है और अब यहाँ कुल 26 अलग-अलग पंडाल लगाए जाते हैं।
यह आयोजन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्तंभ बन गया है। यहाँ दूर-दूर से लोग घूमने आते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी काफी फायदा मिल रहा है।
अमेठी जिले में अन्य प्रमुख पंडाल
हवा महल वाले पंडाल के अलावा पूरे अमेठी जिले में दुर्गा पूजा का व्यापक उत्साह देखा जा रहा है। जिले के कई अन्य हिस्सों में भी बड़े और आकर्षक पंडाल बनाए गए हैं।
मुख्य रूप से इन जगहों पर बड़े पंडाल लगाए गए हैं:
- गौरीगंज के चौक बाजार, दख्खाना मोड़ और सब्जी मंडी।
- सागर तिराहा और मुंशीगंज।
- फुरसतगंज नहर कोठी और सिंहपुर का सेमरौता।
सुरक्षा व्यवस्था और बिजली आपूर्ति
भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। SP Sarvanan T के नेतृत्व में पूरे जिले में निगरानी के लिए ड्रोन और CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अधिकारियों ने सुरक्षा के सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग की व्यवस्था और सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखने के प्रावधान शामिल हैं।
इसके साथ ही, उत्सव के दौरान बिजली न कटे, इसके लिए Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं ताकि निर्बाध बिजली आपूर्ति बनी रहे।
धार्मिक अनुष्ठानों के तहत दुर्गा सप्तशती का पाठ जारी है। यह पूरा उत्सव 21 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा।

























