पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने न्यूटाउन से एक बयान जारी किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश में सक्रिय भारत विरोधी समूह भारत के भीतर भी अपना नेटवर्क चला रहे हैं।
दिलीप घोष का आरोप है कि ये समूह देश में अशांति फैलाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए एक समन्वित चेन बनाने की कोशिश की जा रही है।
विदेशी फंडिंग और धन के लेन-देन का दावा
मंत्री दिलीप घोष ने अपनी चिंताओं को विस्तार से बताते हुए दावा किया कि विदेशी स्रोतों से भारत में भारी मात्रा में पैसा आ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन विनाशकारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली से कोलकाता तक वित्तीय सहायता भेजी जा रही है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ये घटनाक्रम आंदोलनों के एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं। दिलीप घोष के अनुसार इस स्थिति पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
बांग्लादेश की स्थिति और आंतरिक सुधार
पड़ोसी देश की राजनीतिक स्थिति पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत बांग्लादेश की प्रगति और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने वहां की वर्तमान कानून व्यवस्था की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है।
दिलीप घोष ने कहा कि बांग्लादेश की जनता इस समय काफी संकट और परेशानी का सामना कर रही है। उन्होंने वहां के नेतृत्व से आग्रह किया कि वे आंतरिक सुधारों और व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करें।
विपक्ष और सुरक्षा बलों पर राजनीतिक आरोप
यह बयान विदेशी और घरेलू प्रभाव से जुड़ी हालिया राजनीतिक तनाव की घटनाओं के बाद आया है। दिलीप घोष ने 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विपक्षी नेताओं के जमावड़े पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्हें मतदाताओं ने बार-बार खारिज कर दिया है, वे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने इन प्रदर्शनों के लिए आने वाली फंडिंग के स्रोत पर भी सवाल खड़े किए।
इसके अलावा, 18 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक माहौल तब गरमाया जब तृणमूल कांग्रेस ने छात्र-युवा आंदोलनों के खिलाफ सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। यह मामला रक्षा मंत्री Rajnath Singh की उन चेतावनियों से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में बांग्लादेश जैसी अराजकता फैलाने की कोशिशें की जा सकती हैं।

























