भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक समझौते को विजयदशमी के त्योहार के अवसर पर प्रभावी किया गया है। इस डील के जरिए भारतीय निर्यातकों को अब न्यूजीलैंड के बाजारों में पूरी तरह से ड्यूटी फ्री एक्सेस मिल जाएगा।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री Todd McClay ने 19 अक्टूबर 2026 को एक संयुक्त वर्चुअल समारोह के दौरान इस समझौते के सक्रिय होने की पुष्टि की। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य इंडिया न्यूजीलैंड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप रोडमैप 2030 को आगे बढ़ाना है।
इस रोडमैप के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार में बड़ी बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है। Press Information Bureau की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों की योजना 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को लगभग NZ$7 बिलियन तक पहुँचाने की है।
गौरतलब है कि हाल के समय में दोनों देशों के बीच व्यापार का वार्षिक स्तर 1.15 बिलियन डॉलर से 2.4 बिलियन डॉलर के बीच रहा है।
बाजार पहुंच और निवेश के नए नियम
न्यूजीलैंड ने भारतीय निर्यात के लिए सभी टैरिफ लाइनों पर कस्टम ड्यूटी खत्म करने पर सहमति जताई है। इससे पहले यहाँ पीक टैरिफ 10 प्रतिशत तक पहुँच जाते थे, जिन्हें अब हटा दिया गया है। यह नीति टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग उत्पादों सहित कई सामानों पर लागू होगी।
Press Information Bureau के मुताबिक, न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन डॉलर के निवेश की सुविधा देने का भी वादा किया है। वहीं भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए डेयरी, चीनी, आर्टिफिशियल हनी और प्याज व चने जैसी कुछ खास कृषि वस्तुओं को इस उदारीकरण से बाहर रखा है।
भारत सरकार अपनी 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर टैरिफ छूट दे रही है। यह न्यूजीलैंड से भारत आने वाले वर्तमान निर्यात मूल्य के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। इन विवरणों की पुष्टि Press Information Bureau द्वारा की गई है और इन्हें The Economic Times और Mint जैसे माध्यमों ने रिपोर्ट किया है।
सेवा क्षेत्र और वीजा नियमों में बदलाव
इस व्यवस्था में सेवाओं को एक मुख्य आधार बनाया गया है। न्यूजीलैंड ने 118 सेक्टरों और सब-सेक्टरों में पहुंच प्रदान की है और 139 क्षेत्रों में मोस्ट फेवर्ड नेशन ट्रीटमेंट देने का वादा किया है। आयुर्वेद और योग सहित पारंपरिक चिकित्सा के लिए इसमें विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इस समझौते के तहत भारतीय नागरिकों के लिए वीजा के नए नियम तय किए गए हैं:
- हर साल 5,000 अस्थायी रोजगार एंट्री वीजा का कोटा तय किया गया है।
- 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा भारतीय नागरिकों को दिए जाएंगे।
छात्रों के लिए भी नए नियमों के तहत सहायता दी जाएगी। भारतीय छात्रों के नामांकन पर कोई संख्यात्मक सीमा नहीं होगी। STEM क्षेत्रों के स्नातक अब पढ़ाई के बाद तीन साल तक के वर्क राइट्स पा सकेंगे, जबकि डॉक्टरेट स्कॉलर्स के लिए यह पात्रता चार साल की होगी।
माल की आवाजाही को तेज करने के लिए कस्टम क्लीयरेंस के नियम तय किए गए हैं। जनरल कार्गो के लिए 48 घंटे और जल्दी खराब होने वाले सामानों (perishable goods) के लिए 24 घंटे के भीतर कस्टम क्लीयरेंस अनिवार्य होगा।
कृषि विकास और औद्योगिक विस्तार
संधि के हिस्से के रूप में एक एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी पार्टनरशिप बनाई गई है। इसका उद्देश्य टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए भारतीय किसानों की पैदावार बढ़ाना है। इन प्रयासों की निगरानी के लिए एक संयुक्त परिषद बनाई जाएगी, जिसके तहत किवीफ्रूट, सेब और शहद के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस संचालित होंगे।
इन सहयोगी प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ घरेलू बाजार की सुरक्षा के लिए मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस और टैरिफ रेट कोटा लागू रहेंगे। कॉमर्स सचिव Rajesh Agrawal ने कहा कि अब मुख्य काम जिला स्तर पर इंडस्ट्री एसोसिएशनों को जोड़कर इन उच्च स्तरीय अवसरों को वास्तविक लाभ में बदलना है।
न्यूजीलैंड के मंत्री Todd McClay ने इस संधि को एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है। उन्होंने कहा कि इससे उनके देश को 1.4 बिलियन उपभोक्ताओं वाले बाजार तक पहुंच मिलेगी। इन बातों को CNBC-TV18 और The Indian Express ने अपनी रिपोर्ट में प्रमुखता से दिखाया है।
अब वाणिज्य मंत्रालय और उद्योग निकाय नए व्यापार अधिमानों को समझने के लिए व्यापक आउटरीच अभियान चलाएंगे। समझौता लागू होने के दिन ही भारत ने पुणे में बनी एक JCB मशीन का पहला निर्यात न्यूजीलैंड के लिए रवाना किया।
भविष्य के कार्यक्रमों में ओशिनिया बाजार में भारतीय उत्पादों की मौजूदगी बढ़ाने के लिए लेदर, स्पोर्टिंग गुड्स और फुटवियर जैसे सेक्टरों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

























